अमेरिका में पंजाबियों की नौकरी पर संकट, पूर्व IAS सिद्धू की भारत से मांग- 60 दिन का ग्रेस पीरियड खत्म करने का हो विरोध
अमेरिका में एच-1बी वीजा संकट से पंजाब के इंजीनियर प्रभावित हो रहे हैं, जिस पर पूर्व स्पेशल चीफ सेक्रेटरी केबीएस सिद्धू ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

एच-1बी वीजा संकट से पंजाब के इंजीनियर प्रभावित हो रहे हैं (फाइल फोटो)
HighLights
एच-1बी ग्रेस अवधि खत्म करने का भारत करे विरोध
विदेश में नौकरी दिलाने वाली कंसल्टेंसी को लाइसेंस मिले
लौटे इंजीनियरों को पंजाब में रोजगार के अवसर मिलें
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे भारतीयों पर बढ़ते संकट के बीच पंजाब से विदेश में नौकरी के लिए जाने वाले इंजीनियरों और प्रोफेशनल्स का मुद्दा भी सामने आया है।
पंजाब के पूर्व स्पेशल चीफ सेक्रेटरी केबीएस सिद्धू ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अमेरिका में नौकरी गंवाने वाले एच-1बी कर्मचारियों को मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस अवधि खत्म करने के प्रस्ताव का औपचारिक विरोध किया जाए।
इसके साथ ही भारत में विदेश में नौकरी दिलाने वाली कंसल्टेंसी को लाइसेंस व्यवस्था के तहत लाने की मांग की गई है।
सिद्धू ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को भेजे पत्र में कहा है कि ह्यूस्टन स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में उन भारतीय परिवारों के लिए लीगल एड और एडवाइजरी डेस्क बनाया जाए, जिनकी नौकरी चली गई है या जिनकी प्रायोजक कंपनी जांच के घेरे में है।
उन्होंने कहा कि फर्जी नौकरी और फर्जी स्पांसरशिप देने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसकी वजह से नियमों का पालन करने वाले पूरे भारतीय समुदाय को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।
पंजाब की कंसल्टेंसी को भी नियमन के दायरे में लाने की मांग
सिद्धू ने विशेष रूप से पंजाब के पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल्स रेगुलेशन एक्ट-2012 का उदाहरण देते हुए विदेश में नौकरी दिलाने वाली कंसल्टेंसी को भी लाइसेंस के दायरे में लाने का सुझाव दिया है।
उनका कहना है कि पंजाब समेत देश के कई हिस्सों में ट्रेनिंग और प्लेसमेंट कंसल्टेंसी इंजीनियरों को विदेश में नौकरी और एच-1बी स्पांसरशिप दिलाने के दावे करती हैं, लेकिन इन पर प्रभावी नियमन जरूरी है।
उन्होंने केंद्र को भेजे पत्र में कहा कि ऐसी कंसल्टेंसी भारत में ही काम करती हैं और भारतीय कानून के दायरे में आती हैं। इसलिए विदेश जाने वाले युवाओं को फर्जी स्पांसरशिप या फर्जी नौकरी के नाम पर नुकसान से बचाने के लिए इनके लिए स्पष्ट लाइसेंस और जवाबदेही व्यवस्था होनी चाहिए।
अमेरिका से लौटे इंजीनियरों को पंजाब में रोजगार देने का सुझाव
सिद्धू ने कहा कि अगर एच-1बी वीजा संकट के कारण पंजाब के इंजीनियर और अन्य प्रोफेशनल्स अमेरिका से लौटते हैं तो इसे सिर्फ संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन युवाओं के पास अमेरिका में काम करने का वर्षों का अनुभव है, जिसका इस्तेमाल पंजाब में किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जो इंजीनियर 10-15 वर्ष का अंतरराष्ट्रीय अनुभव लेकर लौटता है, वह पंजाब की इंडस्ट्री और आइटी क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। ऐसे प्रोफेशनल्स को मोहाली समेत राज्य के अन्य औद्योगिक और आइटी केंद्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर सरकार को विचार करना चाहिए।
10 नवंबर से पहले भारत को दर्ज कराना है विरोध
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने 11 सितंबर 2026 को एच-1बी कर्मचारियों की 60 दिन की ग्रेस अवधि खत्म करने का प्रस्ताव प्रकाशित किया था।
सिद्धू ने मांग की है कि भारत सरकार 10 नवंबर की समयसीमा से पहले इस प्रस्ताव पर औपचारिक टिप्पणी दाखिल करे और अमेरिका से आग्रह करे कि किसी भी बदलाव को पहले से अमेरिका में रह रहे कर्मचारियों पर तत्काल लागू न किया जाए।
सिद्धू ने कहा कि फर्जी कंपनियों पर कार्रवाई अपनी जगह जरूरी है, लेकिन उनकी वजह से नियमों का पालन करने वाले भारतीय परिवारों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उनका स्पष्ट कहना है कि 'एनफोर्समेंट कंपनियों का नाम ले सकता है, लेकिन किसी पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।
