चंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। कैप्‍टन अमरिंदर सिंह मंत्रिमंडल बहुप्रतीक्षित विस्‍तार तय हो जाने के साथ ही इस पर 'कलह' भी शुरू हाे गई है। मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने पर कांग्रेस के टांडा (होशियारपुर) से विधायक संगत सिंह गिलजियां ने पार्टी के प्रदेश उपप्रधान पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके अलावा कई और विधायक हैं जो अंदर ही अंदर धधक रहे हैं, लेकिन नाराजगी जाहिर करने की फिलहाल हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

मंत्री पद न मिलने से कई वरिष्ठ विधायकों का रोष आ सकता है सामने

पहले से ही संभावना जताई जा रही थी कि कैबिनेट विस्तार होते ही कई विधायकों की नाराजगी सामने आ सकती है। गिलजियां पिछड़े वर्ग से आते हैं। उनको पूरी उम्मीद थी कि उनके वर्ग को प्रतिनिधित्व देते हुए मंत्रिमंडल में लिया जाएगा परंतु उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को अपने मंत्रिमंडल को पूरा करने के लिए जिन नौ विधायकों को मंत्री पद के लिए चुना है उनमें से एक भी दलित समुदाय से नहीं है। ऐसे में इस समुदाय का नाराज होना भी स्वाभाविक है। अमृतसर से डॉ राजकुमार वेरका तीन बार से लगातार विधायक हैं। कैप्टन का करीबी होने के नाते उनको मंत्री बनने की पूरी उम्मीद थी लेकिन ओपी सोनी और सुखविंदर सिंह सरकारिया को मंत्री बनाकर कैप्टन ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया है।

परगट को मंत्री न बनाने से नवजोत सिद्धू भी जता सकते हैं नाराजगी

वैसे तो नए मंत्रिमंडल से कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू भी खुश नहीं हैं क्योंकि वह परगट सिंह को मंत्री बनवाना चाहते थे लेकिन उनकी नहीं चली। लिहाजा वह अपनी इस नाराजगी को कब और कैसे व्यक्त करते हैं, यह आने वाला समय ही बताएगा। कैप्टन ने जालंधर में नया स्पोर्ट्स मिनिस्टर बनाने का संकेत दिया तो यह चर्चा शुरू हो गई थी कि वह परगट सिंह को मंत्री बनाएंगे।

कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को कैबिनेट में जाने से रोकना चाहते थे लेकिन वह भी ऐसा नहीं कर सके। चार बार के विधायक सोढ़ी सीएम कैप्टन से अपनी नजदीकियों का फायदा उठाते हुए पहली बार कैबिनेट में दाखिल हो गए। युवा नेता अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग और राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले कुलजीत नागरा भी नाराज होंगे क्योंकि वह यूथ कोटे से ज्यादा मंत्री बनने की बात कर रहे थे।

पांच बार जीते पांडे पर भारी पड़े आशू

कैबिनेट विस्तार में वरिष्ठता को भी दरकिनार किया गया। पांचवीं बार विधायक बने राकेश पांडे के स्थान पर दो बार के विधायक व युवा भारत भूषण आशू को महत्व दिया गया। कैबिनेट विस्तार में सबसे बड़ा झटका भी राकेश पांडे और राजकुमार वेरका को लगा है। रिजर्व कोटे से आने वाले वेरका नाराज भी हो गए हैं।

सूत्र बताते हैं कि उन्हें मनाने की कोशिश की जा रही है। लगातार यह संकेत दिए जा रहे थे कि उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भïट्ठल के करीबी राकेश पांडे भी कैबिनेट में स्थान नहीं बना पाए। हालांकि पांडे से ज्यादा सुरेंदर डाबर को तवज्जो दी जा रही थी।

डाबर तीसरी बार विधायक हैं। जिस प्रकार से नगर निगम चुनाव में भारत भूषण आशू का कद बढ़ा और उनकी पत्नी को मेयर नहीं बनाया गया उससे ही स्पष्ट हो गया था कि आशू को मंत्रिमंडल में एडजस्ट किया जा सकता है। पांडे के लिए लॉबिंग करने वाला कोई नहीं था क्योंकि भट्ठल खुद ही इन दिनों हाशिये पर चल रही हैं। 

Posted By: Sunil Kumar Jha

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!