जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सरकारी ऑफिस का सोचते ही जहन में रैक पर धूल फांकती फाइलों का ढेर घूमने लगता है। फाइलों के बंडल इधर से उधर घूमते हैं। फाइलों की डायरी डिस्पैच का काम होता है। लेकिन अब यह सभी गुजरे जमाने की चीज होने वाले हैं। अब सरकारी ऑफिसर हाईटेक होने वाले हैं। अब इनमें न तो रैक पर लदी फाइलों के ढेर दिखेंगे और न ही दफ्तरी बाबू फाइल को दबाकर बैठ सकेगा। फाइल को एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच हाथ में ले जाने की जरूरत नहीं रहेगी। आप बिल्कुल ठीक समझ रहे हैं। सरकारी दफ्तर तो होंगे लेकिन फाइलें गायब हो जाएंगी। कोई पेपर देखने को नहीं मिलेगा। गवर्नमेंट ऑफिस को पेपरलेस करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पुराने सरकारी ऑफिस ई-ऑफिस में बदलने जा रहे हैं।

यूटी प्रशासन का हॉस्पिटेलिटी डिपार्टमेंट अगले सप्ताह से पेपरलेस होने जा रहा है। गेस्ट हाउस-1 और गेस्ट हाउस-2 में सितंबर के दूसरे सप्ताह से पूर्ण ई-ऑफिस लागू किया जा रहा है। काम का सरलीकरण, उत्तरदायी, प्रभावी और पारदर्शी करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस ई-ऑफिस सिस्टम को लागू करने के लिए सोमवार को हॉस्पिटेलिटी डिपार्टमेंटी का ट्रेनिंग सेशन हुआ। एनआइसी ने स्टाफ को खास ट्रेनिंग दी। इस इस एनवायर्नमेंट फ्रेंडली पहल से न केवल कार्य क्षमता बढ़ेगी बल्कि पारदर्शिता और सर्विस डिलिवरी भी बेहतर होगी। इसके लिए डिपार्टमेंट का स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर भी तैयार किया गया है।

डिजिटल होंगी डाक

कोई भी डाक अब रिसेप्शन पर लेने के बाद इन्हें स्कैन कर ई-डाक में बदला जाएगा। इसके बाद रिसेप्शन सभी ई-डाक को ई-ऑफिस मॉडयूल से संबंधित अधिकारी तक भेजेगा। इसके बाद प्रशासन के दूसरे ऑफिसर भी इसी प्रक्रिया के तहत ई-ऑफिस में बदलेंगे।

Edited By: Ankesh Thakur