चंडीगढ़ [इन्द्रप्रीत सिंह]। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद पराली न जलाने वाले किसानों को सौ रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाले मुआवजे को लेकर पंजाब सरकार ने फिर से नियम बदल दिए हैं। अब एक नहीं बल्कि दो से तीन जगह पर वेरीफाई होकर किसानों को भुगतान होगा। काबिले गौर है कि दो दिन पहले कई जगह उन किसानों ने भी सरपंचों के साथ मिलीभगत करके मुआवजा ले लिया था जिनके पास कोई जमीन ही नहीं थी।

सहकारी कोऑपरेटिव सोसायटियों को किसानों के फार्म पोर्टल पर अपलोड करने थे, लेकिन कुछ ऐसी शिकायतें भी आईं थीं कि सोसायटियों ने कैफे के मालिकों को अपने पासवर्ड देकर काम करवाना शुरू कर दिया। लिहाजा दो दिन में ही सरकार को पोर्टल बंद करके मुआवजा देने का काम रोकना पड़ा।

अब दो दिन की मशक्कत के बाद एक बार फिर सरकार ने नियमों में बदलाव करके पोर्टल को खोलने का फैसला किया है। खेती विभाग के सूत्रों के अनुसार मंगलवार से पोर्टल फिर से खुल जाएगा और किसान अपने आवेदन इस पर चढ़वा सकेंगे। किसानों के फार्म पर अब संबंधित गांव के सरपंच के अलावा पंचायत सचिव के भी हस्ताक्षर होंगे। इन सभी फार्मों को पंचायत सचिव कोऑपरेटिव विभाग के पास ऑनलाइन डाटा अपलोड करने के लिए भेजेगा। पहले केवल सरपंच को वेरीफाई करना था कि संबंधित किसान ने अपनी जमीन पर पराली नहीं जलाई और उसके पास पांच एकड़ से कम जमीन है। पंचायत सचिवों को गांव में पराली जलाने की घटनाओं का भी पूरा रिकार्ड रखना होगा ताकि इसे एसडीएम और डीसी देखना चाहें तो देख सकें।

सहायक रजिस्ट्रार भी करेंगे अप्रूव

पंचायत सचिवों की ओर से भेजे गए रिकार्ड, स्कैन किए गए फार्म जिसे सहकारी सोसायटियां अपलोड करेंगी उन्हें अब संबंधित इलाके के सहायक रजिस्ट्रार भी अप्रूव करेंगे। दूसरी ओर इस रिकार्ड की जांच अब पटवारियों के अलावा कानूनगो, तहसीलदार से भी करवाई जाएगी। इससे पहले केवल पटवारियों को ही रिपोर्ट देनी थी। अधिकारियों को यह बताना होगा कि आवेदक के परिवार के पास कितनी जमीन है, कितने एकड़ में गैर बासमती धान की फसल लगाई गई और गिरदावरी के अनुसार कितनी जमीन पर पराली को जलाया गया है।

एसडीएम भेजेंगे रिपोर्ट डीसी को

तहसीलदार से रिपोर्ट मिलने के बाद आवेदन को एसडीएम के लॉगइन में सबमिट किया जाएगा। एसडीएम रिमोट सेंसिंग रिपोर्ट और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट से इसे वेरीफाई करके डीसी को अप्रूवल के लिए भेज देंगे। डीसी मुआवजा देने के लिए इन केसों को खेतीबाड़ी विभाग के डायरेक्टर के पास भेजेंगे। डायरेक्टर पास हुए केसों को संबंधित बैंकों को भेज देंगे ताकि राशि किसानों के खातों में भेजी जा सके। अगर कोई पेमेंट फेल होती है तो यह वापस एसडीएम के पास चली जाएगी।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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