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मोबाइल फोन चोरी से तीन Gmail खाते बंद, इंजीनियरिंग छात्र को डाटा मिटने का डर; हाईकोर्ट का Google India को नोटिस

Published: Mon, 26 Oct 2026 07:27 PM (IST)

मोबाइल फोन चोरी होने के बाद तीन जीमेल खातों तक पहुंच खोने वाले इंजीनियरिंग छात्र की याचिका पर हाईकोर्ट ने ...और पढ़ें

जीमेल खाते बंद होने से इंजीनियरिंग छात्र की परेशानी हाईकोर्ट तक पहुंची। (एआई जनरेटेड इमेज)

जीमेल खाते बंद होने से इंजीनियरिंग छात्र की परेशानी हाईकोर्ट तक पहुंची। (एआई जनरेटेड इमेज) 

HighLights

  1. गूगल इंडिया पर अपीलीय समिति के आदेश की अनदेखी का आरोप।

  2. हाईकोर्ट ने निजता के अधिकार पर गूगल इंडिया से जवाब मांगा।

  3. अगली सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तारीख निर्धारित की।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। मोबाइल फोन चोरी होने के बाद तीन जीमेल खातों तक पहुंच खो देने वाले 19 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र की परेशानी अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गई है। छात्र का आरोप है कि पहचान साबित करने और अपना निजी डिजिटल डाटा वापस पाने की कोशिशों के बावजूद उसे राहत नहीं मिली।

शिकायत निवारण अपीलीय समिति के निर्देश के बाद भी गूगल इंडिया ने उसके खातों का डाटा वापस दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मामले में हाईकोर्ट ने गूगल इंडिया प्राइवेट को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

जस्टिस त्रिभुवन दहिया की अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तारीख निर्धारित की है। याचिकाकर्ता मोहाली निवासी आशीष रंजन मिश्रा के अनुसार, दो साल से अधिक समय पहले बलौंगी क्षेत्र स्थित दशमेश मार्केट में उसका मोबाइल फोन चोरी हो गया था।

यह मोबाइल फोन उसके तीन आपस में जुड़े जीमेल खातों के लिए दो-स्तरीय सत्यापन का एकमात्र विश्वसनीय उपकरण था। फोन चोरी होने के बाद वह तीनों खातों तक पहुंच नहीं बना सका। इससे उसके निजी डिजिटल डाटा को वापस पाने का रास्ता भी बंद हो गया।

छात्र ने अदालत को बताया कि शिकायत निवारण अपीलीय समिति ने 21 अगस्त को गूगल इंडिया को निर्देश दिया था कि वह जीमेल खातों का डाटा वापस पाने के लिए उसे उचित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराए। इसके बावजूद कंपनी ने कोई कार्रवाई नहीं की।

डाटा मिटने की आशंका से बढ़ी चिंता

याचिका में गूगल की उस कथित नीति पर भी सवाल उठाया गया है, जिसके तहत ईमेल का डाटा दो वर्ष तक सुरक्षित रखने का प्रावधान बताया गया है। छात्र का दावा है कि यह अवधि डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के तहत निर्धारित न्यूनतम तीन वर्ष की अवधि से कम है।

यह याचिकाकर्ता की दलील है, जिस पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है। छात्र ने आशंका जताई कि कंपनी की निष्क्रियता संबंधी नीति के तहत उसका निजी डाटा कभी भी स्वत: नष्ट हो सकता है। इससे उसे अपनी व्यक्तिगत जानकारियों और डिजिटल सामग्री से हमेशा के लिए हाथ धोना पड़ सकता है।

निजता के अधिकार का दिया हवाला

याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले निजता के मौलिक अधिकार का हवाला दिया। उसके वकील ने दलील दी कि जब किसी व्यक्ति को अपने निजी डाटा पर नियंत्रण रखने, उसके इस्तेमाल की जानकारी प्राप्त करने और उसमें सुधार कराने का अधिकार है, तो पहचान स्थापित करने के बाद अपना डाटा वापस पाने का अधिकार भी इसी का हिस्सा होना चाहिए।

वकील के अनुसार, यदि व्यक्ति को अपना डाटा मिटवाने का अधिकार है, तो उसे डाटा सुरक्षित रखने और उसे मिटाए जाने से रोकने की मांग करने का अधिकार भी मिलना चाहिए। याचिका में कहा गया कि डाटा पर नियंत्रण का अधिकार तभी सार्थक है, जब उसमें डाटा वापस पाने का विकल्प भी शामिल हो। अब मामले में गूगल इंडिया का पक्ष आना बाकी है। हाईकोर्ट में 20 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।