रेमिगेट को 40 करोड़ की छूट रद, ब्याज-जुर्माने समेत बकाया चुकाना होगा; गमाडा के ACA की भूमिका पर उठे सवाल
मोहाली में रेमिगेट बिल्डेस्टेट्स को दी 40 करोड़ की छूट रद कर दी है। कंपनी को राहत देते समय महत्वपूर्ण ...और पढ़ें

मोहाली में व्यावसायिक साइट के लिए दिल्ली की कंपनी रेमिगेट दी छूट रद। (एआई जनरेटेड फोटो)
HighLights
निर्माण की मंजूरी मिलने के तथ्य को किया नजरअंदाज।
आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी का आदेश।
कंपनी की अतिरिक्त राहत की मांग वाली रिवीजन याचिका खारिज।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। मोहाली में व्यावसायिक साइट के लिए दिल्ली की कंपनी रेमिगेट बिल्डेस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को दी गई करीब 40 करोड़ रुपये की छूट रद कर दी गई है। कंपनी को अब ब्याज और जुर्माने समेत बकाया चुकाना होगा।
पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विकास गर्ग ने 15 अक्टूबर को जारी रिवीजन आदेश में कहा कि गमाडा के अपीलीय प्राधिकरण सह अतिरिक्त मुख्य प्रशासक अमरिंदर सिंह मल्ही ने कंपनी को राहत देते समय निर्माण संबंधी महत्वपूर्ण मंजूरियों को नजरअंदाज किया था।
कंपनी को 2017 में बिल्डिंग प्लान की मंजूरी मिली थी और नौ मार्च 2021 को प्लिंथ/डीपीसी स्तर तक निर्माण की अनुमति भी मिल चुकी थी। ऐसे में साइट पर निर्माण संभव नहीं होने के कंपनी के दावे पर सवाल उठते हैं।
19 पन्नों के आदेश में प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने कंपनी की अतिरिक्त राहत की मांग वाली रिवीजन याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी पहले भवन का निर्माण पूरा करती और इसके बाद सुविधाओं की कमी के आधार पर छूट मांगती तो उसकी मंशा पर विचार किया जा सकता था।
इसके बजाय कंपनी ने निर्माण रोक दिया और किस्तों का भुगतान भी बंद कर दिया। करीब 40 करोड़ रुपये की यह छूट फरवरी 2026 में गमाडा के अतिरिक्त मुख्य प्रशासक ने मंजूर की थी।
2015 में 32.50 करोड़ में हुई थी साइट की नीलामी
यह मामला मोहाली के सेक्टर-62 में 1.13 एकड़ की फूड कोर्ट साइट के आवंटन से जुड़ा है। सितंबर 2015 में नीलामी के जरिये यह साइट रेमिगेट को 32.50 करोड़ रुपये में आवंटित की गई थी।
कंपनी ने राहत मांगते हुए साइट पर भारमुक्त जमीन नहीं मिलने, सड़क संपर्क खराब होने, पानी की आपूर्ति की कमी, प्लाट से सीवर लाइन गुजरने और वैधानिक मंजूरियों में देरी का हवाला दिया था।
फरवरी 2026 में गमाडा की 34वीं अथारिटी बैठक में कंपनी को करीब 40 करोड़ रुपये की छूट देने का फैसला किया गया था। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने की थी।
बताया गया कि वित्त विभाग की आपत्तियों के बावजूद यह राहत मंजूर की गई। अथारिटी ने साइट को निर्माण के लिए अनुपयुक्त माना था, जबकि विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक वहां निर्माण शुरू हुआ था और 2022 में रोक दिया गया।
गमाडा की इंजीनियरिंग रिपोर्ट में इसके विपरीत कहा गया था कि साइट तक आसपास की सड़कों से पहुंच संभव है। नजदीक 100 फुट चौड़ी सड़क के साथ सीवरेज और बरसाती पानी की निकासी की सुविधाएं भी उपलब्ध थीं।
2016 से किस्तें देना बंद, ब्याज समेत बकाया वसूलेगा गमाडा
आदेश के मुताबिक, कंपनी ने 2016 में किस्तों का भुगतान बंद कर दिया था। मार्च 2026 में जारी संशोधित भुगतान कार्यक्रम का भी पूरी तरह पालन नहीं किया गया। एक सितंबर तक 26.46 करोड़ रुपये देय थे, जबकि कंपनी ने करीब 22.46 करोड़ रुपये ही जमा किए। आदेश में 13 अक्टूबर तक लगभग 24 करोड़ रुपये बकाया होने का उल्लेख किया गया है।
प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने गमाडा को निर्देश दिया है कि प्राप्त भुगतानों को समायोजित करने के बाद मूल बकाया, लागू ब्याज, दंडात्मक ब्याज और निर्माण नहीं करने पर लगने वाले शुल्क सहित पूरी देनदारी की गणना की जाए।
इसके बाद कंपनी को दो सप्ताह के भीतर मदवार विवरण दिया जाए। कंपनी को बकाया चुकाने के लिए एक महीने का समय मिलेगा। भुगतान नहीं करने की स्थिति में साइट का आवंटन रद करने और जमा राशि जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इसके लिए नियमानुसार नोटिस और सुनवाई का उचित अवसर देना होगा।
ईडी की जांच के दायरे में गमाडा के अधिकारी
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जमीन आवंटन और बकाया राशि में छूट से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के बीच सामने आया है। ईडी ने पंजाब पुलिस को पत्र लिखकर गमाडा के अधिकारियों और कंपनी के निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
एजेंसी ने मनी लाॅन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में 17 अक्टूबर को कंपनी के प्रमोटर जगमोहन गर्ग को गिरफ्तार किया था। ईडी ने अगस्त में गमाडा के मुख्य अभियंता अजय गर्ग, पूर्व मुख्य अभियंता सुनील कंसल और तत्कालीन भूमि अधिग्रहण अधिकारी हरदीप सिंह को तलब कर धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे थे।
पिछले महीने गमाडा कार्यालय में तीन दिन तक चली तलाशी के दौरान एजेंसी ने दस्तावेज और इलेक्ट्रानिक उपकरण जब्त किए थे। ईडी ने आरोप लगाया है कि बिना बिके भूमि के कुछ भूखंडों के आरक्षित मूल्य में कथित हेरफेर से गमाडा और पंजाब सरकार को करीब 10,000 करोड़ रुपये तक का संभावित नुकसान हो सकता था।
अब 40 करोड़ रुपये की छूट रद होने के बाद जांच में उन अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी, जिन्होंने कंपनी को राहत देने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया था।
