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ED का बड़ा खुलासा: GMADA में 7 साल तक पुराने रेट पर बांटे प्लॉट, सरकारी खजाने को 400 करोड़ रुपये की चपत

By Rohit KumarEdited By: Prince Sharma
Published: Sat, 24 Oct 2026 11:10 AM (IST)

ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि गमाडा ने सात साल तक विस्थापितों को पुरानी दरों पर प्लॉट आवंटित ...और पढ़ें

गमाडा मामले में ईडी के बड़े खुलासे (फाइल फोटो)

गमाडा मामले में ईडी के बड़े खुलासे (फाइल फोटो)

HighLights

  1. गमाडा ने सात साल तक पुरानी दरों पर प्लॉट बांटे

  2. पंजाब सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ

  3. ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है इस मामले में

रोहित कुमार, चंडीगढ़। जमीन की कीमतें सात साल में करीब तीन गुना बढ़ गईं, लेकिन गमाडा में विस्थापितों को प्लॉट आवंटित करने के लिए पुरानी दरें ही चलती रहीं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में सामने आया है कि वर्ष 2018 में तय 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की दर पर वर्ष 2025-26 तक प्लॉटों के आवंटन पत्र जारी किए जाते रहे, जबकि इस दौरान दर बढ़कर 65 हजार रुपये प्रति वर्ग गज हो गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस गड़बड़ी से पंजाब सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

जांच का अहम पहलू यह है कि गमाडा ने समय-समय पर प्लॉटों की दरें बढ़ाईं, लेकिन विस्थापितों के कोटे में आवंटन के दौरान संशोधित दरों को लागू नहीं किया गया। इससे सरकारी जमीन के आवंटन में दरों के निर्धारण और नियमों के पालन पर सवाल खड़े हुए हैं।

दो सेक्टरों में 441 प्लॉट आवंटित

ईडी की जांच के अनुसार, वर्ष 2019 से 2026 के बीच आइटी सिटी के सेक्टर-82 अल्फा और सेक्टर-66 बीटा में विस्थापितों को 441 प्लॉट आवंटित किए गए।

इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 100 और सेक्टर-66 बीटा के 341 प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा 169 आवेदन लंबित हैं। इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 39 और सेक्टर-66 बीटा के 130 आवेदन शामिल हैं।

गमाडा की दरों में लगातार बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2018-19 और 2019-20 में दर 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज थी। वर्ष 2021-22 में यह 32,500 रुपये, 2022-23 में 39 हजार रुपये,

2023-24 में 42,900 रुपये, 2024-25 में 51,500 रुपये और 2025-26 में 65 हजार रुपये प्रति वर्ग गज हो गई। इसके बावजूद पुरानी दरों पर आवंटन पत्र जारी होते रहे।

कमेटी के निर्देश भी लागू नहीं हुए

ईडी की जांच में जून 2020 में हुई एक कमेटी की बैठक भी सामने आई है। इसमें गमाडा और पुडा के वरिष्ठ अधिकारियों, एस्टेट ऑफिसर (प्लॉट्स) और कानूनी सलाहकार ने विस्थापितों के कोटे के तहत प्लॉट आवंटन की दरों पर चर्चा की थी।

गमाडा ने 24 अगस्त 2018 को विस्थापितों के लिए प्लॉट योजना का विज्ञापन जारी किया था।

12 जून 2019 को दरों में संशोधन किया गया। कमेटी ने सेक्टर-82 अल्फा और सेक्टर-66 बीटा में विस्थापितों को 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की दर पर प्लॉट देने का पक्ष लिया था।

बैठक में यह भी दर्ज किया गया कि वर्ष 2018 में आमंत्रित आवेदनों के आवंटन पत्र जारी नहीं किए गए थे। इसके बाद तत्कालीन एस्टेट ऑफिसर को 2013 और 2018 की योजनाओं के सभी सफल आवेदकों को 15 दिन के भीतर आवंटन पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए थे। ईडी के रिकॉर्ड के अनुसार, इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ।

दस्तावेजों की जांच में भी खामियां

जांच एजेंसी ने आवंटन प्रक्रिया में दस्तावेजों की उचित जांच किए बिना आवेदकों को ड्रॉ में शामिल करने और योजना के ब्रोशर में तय समयसीमा के भीतर लेटर आफ इंटेंट(एलओआइ) जारी नहीं करने जैसी खामियां भी चिह्नित की हैं।

गमाडा के मोहाली कार्यालय में पिछले महीने तीन दिन तक चली तलाशी के दौरान ईडी ने विस्थापित नीति से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए थे।

एजेंसी ने अलग से यह आशंका भी जताई है कि बिना बिके जमीन के टुकड़ों के आरक्षित मूल्य में कथित हेरफेर से गमाडा और पंजाब सरकार को करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक का संभावित नुकसान हो सकता है।

पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव विकास गर्ग ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने रिकॉर्ड देखने के बाद मामले की जांच करने की बात कही।