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गमाडा में पुराने रेट पर आवंटित हुए प्लॉट, पंजाब सरकार को 400 करोड़ का नुकसान, ईडी की जांच में उठे सवाल

Published: Fri, 23 Oct 2026 12:29 PM (IST)

गमाडा द्वारा पुराने रेट पर प्लॉट आवंटन से पंजाब सरकार को 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। ईडी इस ...और पढ़ें

गमाडा में प्लॉट आवटन प्रक्रिया पर ईडी ने उठाए सवाल। (सांकेतिक फोटो)

गमाडा में प्लॉट आवटन प्रक्रिया पर ईडी ने उठाए सवाल। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. 25 हजार से 65 हजार रुपये प्रति गज पहुंचे जमीन के रेट।

  2. आउस्टी पॉलिसी के तहत लाभार्थियाें को पुराने रेट पर मिले प्लॉट।

  3. कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद पुराने रेट पर क्यों दिए प्लॉट?

जागरण संवाददाता, मोहाली।  आउस्टी पॉलिसी से पंजाब सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, जिसको लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सवाल उठे हैं। ईडी की जांच के अनुसार, ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) में जमीन की कीमतें बढ़ने के बावजूद प्रभावित जमीन मालिकों को कई वर्षों तक पुराने रेट पर प्लाॅट आवंटित किए जाते रहे।

इससे पंजाब सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। दरअसल, जब सरकार किसी विकास परियोजना के लिए लोगों की जमीन अधिग्रहित करती है तो मुआवजे के अलावा नीति के तहत उन्हें निर्धारित दर पर आवासीय प्लाॅट देने का भी प्रविधान है।

ईडी की जांच में सवाल उठाया गया है कि जमीन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद प्लाॅट्स का आवंटन पुराने रेट पर क्यों जारी रहा। जांच के अनुसार, वर्ष 2018-19 में प्लाॅट का रेट 25 हजार रुपये प्रति गज था।

वर्ष 2025-26 तक यह बढ़कर 65 हजार रुपये प्रति गज हो गया। इसके बावजूद पुराने रेट पर आवंटन पत्र जारी किए जाते रहे। ईडी के अनुसार, इस अंतर के कारण सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

 दो सेक्टरों में 441 प्लाॅट आवंटित

वर्ष 2019 से 2026 के बीच आईटी सिटी के सेक्टर-82 अल्फा में 100 और सेक्टर-66 बीटा में 341 प्लाॅट आवंटित किए गए। इस तरह कुल 441 प्लाॅट आवंटित हुए। वहीं, दोनों सेक्टरों में 169 आवेदन अभी लंबित हैं। इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 39 और सेक्टर-66 बीटा के 130 आवेदन शामिल हैं।

2020 की समिति की बैठक भी जांच के घेरे में

ईडी जून 2020 में हुई एक समिति की बैठक की भी जांच कर रही है। इसमें गमाडा और पुड्डा के वरिष्ठ अधिकारियों ने 2013 और 2018 की योजनाओं के सफल आवेदकों को 25 हजार रुपये प्रति गज की दर से प्लाॅट देने का पक्ष लिया था।

समिति ने सफल आवेदकों को 15 दिनों के भीतर आवंटन पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए थे। हालांकि, ईडी के अनुसार, इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ और बाद के वर्षों में भी पुराने रेट पर आवंटन पत्र जारी होते रहे।

जांच में दस्तावेजों की उचित जांच किए बिना आवेदकों को ड्रॉ में शामिल करने और तय समय पर आशय पत्र जारी नहीं करने जैसी प्रक्रियागत खामियां भी सामने आई हैं।

पिछले महीने गमाडा के मोहाली कार्यालय में तीन दिन तक चली तलाशी के दौरान ईडी ने संबंधित रिकार्ड जब्त किए थे। पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। रिकाॅर्ड की समीक्षा करने के बाद वह इसकी जांच करेंगे।