जेएनएन, मोहाली। मोक्ष पाने व 12 लाख के लालच में वर्ष 2004 में एक परिवार के चार लोगों को भाखड़ा नहर में धक्का देकर मौत के घाट उतारने के दोषी को सीबीआइ अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। मामले के दोषी खुशविंदर सिंह उर्फ खुशों निवासी गांव सुहावी जिला फतेहगढ़ साहिब के खिलाफ 24 अगस्त को सीबीआइ अदालत ने दोष तय किए थे।

अदालत ने खुशविंदर सिंह को धारा 302 (हत्या) में फांसी की सजा व 10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 364 (किडनैपिंग) में उम्रकैद व पांच हजार जुर्माना व धारा 201 (सबूतों को मिटाने) में 4 साल कैद व 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। फांसी के लिए हाईकोर्ट को मोहाली अदालत की ओर से कंफर्मेशन भेजी जाएगी। खुशविंदर को सजा सुनाए जाने के बाद पटियाला जेल भेज दिया गया है।

बता दें, दोषी ने वर्ष 2012 में अपनी पत्नी की मामी के परिवार के 6 लोगों की नहर में फेंककर हत्या कर दी थी। मामले में खुशविंदर सिंह को फतेहगढ़ साहिब की अदालत ने 2014 में फांसी की सजा सुनाई थी। दोषी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसका सुनवाई अभी पेंडिंग है। 

3 जून 2004 को लापता हुआ था पूरा परिवार 

जिक्रयोग है कि फतेहगढ़ साहिब जिले में पड़ते गांव नौगांवा का एक परिवार 3 जून 2004 को अचानक घर से लापता हो गया था। लापता होने वालों में कुलवंत सिंह (42), पत्नी हरजीत कौर (40) , बेटी रमनदीप कौर (17) व बेटा अरविंदर सिंह (14) शामिल थे।

मामले में 5 जून 2004 को बस्सी पठानां पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा की गई जांच में 7 जून को रमनदीप का शव नहर से बरामद हुआ था। उसके बाद 9 जून को कुलवंत सिंह का शव मिला परंतु हरजीत कौर व उसके बेटे अरविंदर सिंह का शव आज तक नहीं मिल पाया है। 

ख्वाजा को पूजने की बात कहकर नहर में दे दिया था धक्का 

खुशविंदर ने नौगांवा के रहने वाले परिवार को झांसे में लेकर कहा कि नहर किनारे ख्वाजा को पूजने से दौलत में बरकत होती है। उसने सुबह अंधेरे में परिवार को नहर किनारे सारी दौलत लेकर बुलाया और उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी। जिसके बाद नहर किनारे उन्हें ख्वाजा पूजने का लालच देकर खड़ा करने उपरांत उसमें धक्का देकर कत्ल कर दिया। 

इंसाफ पाने के लिए मृतका के भाई ने लड़ी 14 साल लड़ाई 

मृतका हरजीत कौर के भाई कुलतार सिंह ने दोषी को सजा दिलाने के लिए 14 साल लड़ाई लड़ी। आज अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मृतका के भाई कुलतार सिंह व उनके बेटे परमिंदर सिंह ने अदालत के फैसले पर संतुष्टि जताते हुए कहा कि उन्होंने इंसाफ पाने के लिए काफी लंबा संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि खुशविंदर सिंह का बड़ा भाई कुलविंदर उनके पास मुंशी का काम करता था और उसी के कहने पर ही उन्होंने खुशविंदर सिंह को फोटो स्टेट मशीन की दुकान खोल कर दी थी।

कत्ल के बाद भी खुशविंदर उनके घर पर आता जाता रहा। फतेहगढ़ साहिब की पुलिस को जब कोई सबूत न मिला तो 2005 में मामले में क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी गई थी। उसके बाद 3 अगस्त 2006 में स्टेट क्राइम ब्रांच ने भी जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। लेकिन, 2007 में कुलतार सिंह ने मामले की जांच सीबीआइ से करवाने के लिए हाई कोर्ट में अपील की और हाई कोर्ट के निर्देशों पर सीबीआइ ने यह केस री-ओपन किया । उन्होंने बताया कि 12 लाख रुपये के लालच में उसने उनकी बहन के पूरे परिवार की हत्या कर दी थी। 

वर्ष 2012 में हुआ था खुलासा 

जून 2012 में खुशविंदर सिंह ने अपनी पत्नी की मामी के परिवार को भी 50 लाख रुपये के लालच में अपना निशाना बनाया था। खुशविंदर को पता था कि इस परिवार ने प्रॉपर्टी बेची है जिसकी रकम उनके पास है। आरोपी ने इस परिवार के पंजाब पुलिस के रिटायर्ड कांस्टेबल गुरमैल सिंह (70), पत्नी परमजीत कौर (60), बेटा गुरिंदर सिंह (30) निवासी मुकंदपुर जिला लुधियाना, रुपिंदर सिंह (35), बेटा जसकीरत सिंह (7) व प्रभसिमरन कौर (6) को नहर किनारे खड़ा कर उसमें धक्का देकर हत्या कर दी थी।

गुरमैल सिंह की बेटी जैसमीन कौर (32) को भी सुखविंदर ने नहर में धक्का दिया था, परंतु किसी कारणवश वह बच गई। उसने ही बाद में पुलिस को शिकायत दी थी। फतेहगढ़ साहिब पुलिस ने जसमीन के बयानों पर खुशविंदर के खिलाफ आइपीसी की धारा 302, 364 व 201 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। खुशविंदर ने गिरफ्तार होने के बाद सीबीआइ के सामने वर्ष 2004 में मारे गए परिवार की बात कबूली थी और कहा था कि रुपये के लालच में उसने सबको मारा था।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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