मोहाली के बेवर्ली गोल्फ एवेन्यू में बयाना देकर फंसे फ्लैट खरीदार, बैंक लोन और रजिस्ट्री अटका; लाखों की रकम पर संकट
मोहाली के सेक्टर-65 स्थित बेवर्ली गोल्फ एवेन्यू में फ्लैट खरीदारों को बैंक ऋण, रजिस्ट्री और स्वामित्व हस्तांतरण में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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बेवर्ली गोल्फ एवेन्यू में बयाना देकर फंसे फ्लैट खरीदार। फोटो जागरण
HighLights
बैंक ऋण, रजिस्ट्री और स्वामित्व हस्तांतरण में खरीदारों को भारी समस्या।
गमाडा के भूमि आवंटन और बकाया राशि पर अनिश्चितता बनी हुई।
ईडी की कार्रवाई से जुड़े संदर्भ ने खरीदारों की चिंताएं बढ़ाईं।
जागरण संवाददाता, मोहाली। सेक्टर-65 स्थित बेवर्ली गोल्फ एवेन्यू में फ्लैट खरीदने और बेचने वाले लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खरीदारों के अनुसार, बैंक ऋण, रजिस्ट्री और स्वामित्व हस्तांतरण से जुड़ी अड़चनों के कारण संपत्ति का सौदा पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
स्तांतरण शुल्क को लेकर भी असमंजस है। इससे उनलोगों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने फ्लैट खरीदने के लिए लाखों रुपये बयाने के रूप में दे रखे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि बैंक से ऋण स्वीकृत होने या राशि जारी होने में देरी होती है, तो खरीदार के लिए शेष भुगतान करना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में बयाने की रकम फंसने का खतरा रहता है। हालांकि, रकम वापस मिलेगी या नहीं, यह संबंधित समझौते की शर्तों पर निर्भर करेगा।
133 करोड़ रुपये से अधिक में खरीदी थी जमीन
बेवर्ली गोल्फ एवेन्यू का विकास एमबी इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड ने किया था। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2015 में सेक्टर-65 में करीब 7.123 एकड़ जमीन गमाडा की नीलामी में 133.19 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
अप्रैल 2023 में बकाया राशि के चलते गमाडा ने भूमि आवंटन रद्द करने की कार्रवाई की थी। उस समय करीब 80 करोड़ रुपये की बकाया राशि का उल्लेख हुआ था। बाद में नोटिस वापस लिए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, मौजूदा बकाये और भूमि आवंटन की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
ईडी की कार्रवाई से जुड़ा संदर्भ भी चर्चा में
सितंबर 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स और उससे कथित रूप से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। गमाडा की जमीनों की नीलामी और निजी बिल्डरों को कथित वित्तीय रियायतों से जुड़े मामलों की जांच का भी उल्लेख किया गया।
बैंक ऋण अटका तो कैसे पूरा होगा सौदा?
खरीदारों की ओर से बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक से ऋण लेने में परेशानी की शिकायतें भी सामने आई हैं। यदि संबंधित बैंकों से ऋण स्वीकृत होने या राशि जारी होने में बाधा आती है, तो इसका असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो अपनी बचत के साथ बैंक ऋण के सहारे फ्लैट खरीद रहे हैं।
खरीदारों और निवासियों की मांग है कि गमाडा भूमि आवंटन, बकाया राशि और रजिस्ट्री की स्थिति स्पष्ट करे। संबंधित बैंक ऋण संबंधी अड़चनों पर जानकारी दें और हस्तांतरण शुल्क की गणना सार्वजनिक की जाए। साथ ही, मलजल शोधन संयंत्र की तकनीकी स्थिति की जांच कर लोगों की शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था बनाई जाए।
