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पंजाब के चप्पड़चिड़ी में देश का सबसे ऊंचा विजय स्तंभ, पर्यटक यहां आएं तो सड़क की हालत देख दोबारा मन न करे

Published: Sun, 27 Sep 2026 02:58 PM (IST)

चप्पड़चिड़ी गांव में स्थित देश का सबसे ऊंचा विजय स्तंभ फतेह बुर्ज सिखों की मुगलों पर ऐतिहासिक जीत का प्रतीक ...और पढ़ें

सिखों की मुगलों पर ऐतिहासिक जीत के प्रतीक फतेह बुर्ज तक जाने वाली सड़क का ऐसा है हाल। फोटो : संजय घिल्डियाल

सिखों की मुगलों पर ऐतिहासिक जीत के प्रतीक फतेह बुर्ज तक जाने वाली सड़क का ऐसा है हाल। फोटो : संजय घिल्डियाल

HighLights

  1. यह सिखों की मुगलों पर ऐतिहासिक जीत का प्रतीक है।

  2. 328 फीट ऊंचा है फतेह बुर्ज, कुतुब मीनार से भी ऊंचा।

  3. खराब सड़क पर्यटकों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है।

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। चंडीगढ़ से महज 20 किलोमीटर दूर मोहाली जिले के चप्पड़चिड़ी गांव की मिट्टी में आज भी बहादुरी की गूंज सुनाई देती है। इसी गांव में बना है कि देश का सबसे ऊंचा विजय स्तभ, जोकि मुगलों पर सिखों की जीत का प्रतीक है।

वर्ल्ड टूरिज्म डे के अवसर पर जहां देश-दुनिया में पर्यटन स्थलों की खूबसूरती और सुविधाओं को बढ़ावा देने की बात हो रही है, वहीं फतेह बुर्ज तक पहुंचने वाली सड़क की बदहाल तस्वीर अलग ही कहानी बयां कर रही है।

ऐतिहासिक फतेह बुर्ज पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है, लेकिन यहां तक पहुंचने वाली उबड़-खाबड़, टूटी और कच्ची सड़क पर्यटकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। सड़क की हालत अब ऐसी बनी है कि कोई एक बार आ जाए तो दोबारा मन न करे।

मोहाली प्रशासन और स्थानीय नेताओं की अनदेखी की वजह से पर्यटकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। प्रशासन और सांसद-विधायक को सड़क की हालत सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा नहीं किया तो विधानसभा चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि फतेह बुर्ज के साथ पंजाब के लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं।

एतिहासिक महत्व, वजीर खान को धूल चटाई थी

फतेह बुर्ज किसी राजा-महाराजा के महल की शोभा नहीं, बल्कि उस एतिहासिक जीत की याद में बनाया गया है जब सिख सेना ने मुगलों के अत्याचार को खत्म किया था। 12 मई 1710 को चप्पड़चिड़ी की रणभूमि में बाबा बंदा सिंह बहादुर के नेतृत्व में सिख सेना ने सरहिंद के मुगल गवर्नर वजीर खान को युद्ध में धूल चटाई थी।

वजीर खान वही था, जिसने गुरु गोबिंद सिंह के दो छोटे साहिबजादों को दीवार में जिंदा चिनवाने का आदेश दिया था। इस जीत के बाद 14 मई 1710 को सरहिंद फतेह हुआ और पहली बार खालसा राज की स्थापना हुई।

यह पहला राज था, जहां जमींदारी प्रथा खत्म कर किसानों को जमीन का मालिक बनाया गया। इसी विजय की याद को अमर रखने के लिए पंजाब सरकार ने चप्पड़चिड़ी में बाबा बंदा सिंह बहादुर जंगी यादगार बनाई, जिसका मुख्य आकर्षण फतेह बुर्ज है।

कुतुब मीनार से 88 फीट ऊंचा

30 नवंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने फतेह बुर्ज को जनता को समर्पित किया था। इसकी ऊंचाई 328 फीट है, जबकि दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई 239.5 फीट है। यानी फतेह बुर्ज की ऊंचाई 88 फीट ज्यादा है। इसी वजह से यह देश का सबसे ऊंचा विक्ट्री टावर माना जाता है।

20 एकड़ में फैली यादगार, पयर्टकों के लिए जानें क्या है खास 

फतेह बुर्ज: तीन मंजिला यह मीनार सिख गुंबद से ढकी है। इसकी तीन मंजिलें तीन जीत की कहानी बताती हैं। 67 फीट समाना की जीत, 117 फीट सधौरा की जीत और 220 फीट चप्पड़चिड़ी की जीत। रात में लाइटिंग के बाद इसका नजारा अद्भुत होता है।

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बाबा बंदा सिंह बहादुर की प्रतिमा: बुर्ज के सामने छोटी पहाड़ियों पर कांस्य की विशाल प्रतिमाएं लगी हैं। बाबा बंदा सिंह बहादुर, भाई बाज सिंह, भाई फतेह सिंह, भाई आली सिंह, भाई माली सिंह और भाई राम सिंह की प्रतिमाएं हैं।

ओपन एयर थिएटर और कैफेटेरिया: यहां इतिहास पर आधारित लाइट एंड साउंड शो भी होता है, जिसके  जरिये चप्पड़चिड़ी से जुड़ी विजयगाथा को दिखाया जाता है।

वाॅटर बॉडी और हेरिटेज गेट: परिसर में एक तालाब बना है, जिसमें बुर्ज का प्रतिबिंब दिखता है। पुराने जमाने के डिजाइन वाले गेट इसे हेरिटेज लुक देते हैं। यहां गाइड भी उपलब्ध हैं जो पूरा इतिहास बताते हैं।

कैसे पहुंचें?

चप्पड़चिड़ी पहुंचना बहुत आसान है। चंडीगढ़ आईएसबीटी से इसकी दूरी करीब 20 किमी है। चंडीगढ़ से लांडरां-सिरहिंद रोड पर लांडरां से पांच किमी आगे चप्पड़चिड़ी गांव है। खुद की गाड़ी या कैब से 40 मिनट में पहुंच सकते हैं। अगर बस से आएं तो चंडीगढ़ से मोहाली-लांडरां रूट पर जाने वाली बस में बैठ जाएं। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट भी नजदीक हैं।