चंडीगढ़, राज्य ब्यूरो। Paddy Burning प्रदेश में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं से यह स्पष्ट है कि ज्यादातर किसान सरकार की अपील और सुझाव को ज्यादा महत्व नहीं दे रहे हैं। इस सीजन में ऐसा लग रहा था कि सरकार के तमाम प्रयासों का असर दिख रहा है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में पराली जलाने के जितने केस सामने आए थे बीते साल इसी अवधि के दौरान चार गुना से भी ज्यादा केस दर्ज किए गए थे। लेकिन यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि त्योहारों की आड़ में किसान पराली को आग ज्यादा लगाएंगे, वैसा ही हुआ। विजयादशी के दिन इस सीजन में पराली जलाने के सबसे ज्यादा 660 केस दर्ज किए गए हैं। प्रदेश में इस साल 14 अक्टूबर तक कुल 1286 मामले सामने आए थे, लेकिन 16 अक्टूबर तक बढ़कर 2375 हो गए। यह अत्यंत चिंताजनक है।

प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों के अधिकारियों को इसे गंभीरता से लेना होगा। ऐसी भी शिकायतें आ रही हैं कि कुछ जिलों में प्रशासन को पराली जलाने की घटनाओं की सूचना देने पर भी किसानों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे तो यही साबित होता है कि किसान ही नहीं अधिकारी भी लापरवाह हैं। ऐसी शिकायतों को खारिज नहीं किया जा सकता है क्योंकि ऐसा पहले भी देखने में आया है कि जब चुनाव नजदीक होते हैं तो पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ या तो कार्रवाई की ही नहीं जाती है या फिर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है।

सत्ता पक्ष को यह डर होता है कि कार्रवाई करने से किसान कहीं नाराज न हो जाएं। चाहे सत्तापक्ष हो या विपक्ष, पर्यावरण की चिंता हर किसी को करनी ही चाहिए। वोटबैंक के चक्कर में पर्यावरण को ताक पर रखने का मतलब है कि हम भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। किसानों को सरकार की योजनाओं का लाभ उठाते हुए पराली का उचित तरीके से निस्तारण करना चाहिए। 

Edited By: Sanjay Pokhriyal