चंडीगढ़, जेएनएन। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के किसानों पर बड़ी टिप्‍पणी की। पराली जलाने पर पंजाब के किसानों को लेकर सख्त रवैया अपनाया। पराली जलाने के मामले में किसानों द्वारा कानून की अनदेखी पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि पंजाब का किसान अब बेचारा नहीं बल्कि लापरवाह हो गया है।

चीफ जस्टिस ने कहा, मुफ्त बिजली, पानी जैसी सुविधाओं के बाद प्रदेश के किसानों को गरीब नहीं मान सकते

चीफ जस्टिस रवि शंकर झा ने महाराष्ट्र और असम के किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी किसान धान की फसल लगाते हैं पर पराली नहीं जलाते। प्रदूषण के मुद्दे पर किसानों के खिलाफ भी सख्त रवैया अपनाने के संकेत देते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि पंजाब देश के कुल कृषि क्षेत्र का सिर्फ 1.5 प्रतिशत है, जबकि यह देश के 50 प्रतिशत अनाज का उत्पादन करता है। ऐसे में पंजाब के किसानों को गरीब कैसे माना जा सकता है, जबकि उसे मुफ्त बिजली, पानी और कर्ज माफी जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं।

हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से उन योजनाओं व प्रयासों की जानकारी मांगी है जो किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए किए गए हैैं। कोर्ट ने कहा है कि सरकार विस्तार से बताए कि पंजाब व हरियाणा के किसानों को पराली जलाने से विमुख करने के लिए क्या-क्या किया गया है। चीफ जस्टिस रवि शंकर झा और जस्टिस राजीव शर्मा की खंडपीठ ने पंजाब व हरियाणा से भी केंद्रीय योजनाओं के आधार पर बनाए गए एक्शन प्लॉन की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भी प्रतिवादियों में शामिल कर लिया है।

फिलहाल किसानों पर पराली जलाने के लिए लगाए जाने वाले जुर्माने की वसूली पर रोक को कायम रखते हुए हाई कोर्ट ने सुनवाई को 30 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया। गौरतलब है कि कोर्ट ने किसानों की वित्तीय कठिनाइयों और किसानों द्वारा आत्महत्याओं के मद्देनजर पिछली सुनवाई पर पराली जलाने पर किसानों से जुर्माने की वसूली के आदेशों को निलंबित रखे जाने के आदेश दिए थे।

केंद्र ने जारी किए 1100 करोड़

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने अदालत को बताया कि किसानों द्वारा पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अब तक 1100 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। कोर्ट द्वारा इस पर विस्तृत जवाब मांगे जाने पर जैन ने अदालत से चार सप्ताह का समय मांगा।

सीधे किसानों के खाते में आए राशि

याचिकाकर्ता के वकील चरणपाल सिंह ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए धन को सीधे किसानों के बैंक खातों में डाले जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्र धनराशि को बढ़ाने के साथ ही इसे भी एलपीजी सब्सिडी की तरह सीधे किसानों के बैंक खातों में डालने की व्यवस्था करे। उन्होंने एक बार फिर कहा कि प्रदूषण से बचने के लिए निरंतर प्रदूषण करने वाले उद्योगोंं पर लगाम लगाई जानी चाहिए।

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कोर्ट ने कही से प्रमुख बातें

- कोर्ट ने कहा, पराली जलाने पर रोक की विस्तृत योजना पेश करे केंद्र सरकार।

-पंजाब व हरियाणा से भी केंद्रीय योजनाओं के आधार पर बनाए एक्शन प्लॉन की मांगी जानकारी।

-किसानों से जुर्माने की वसूली पर रोक कायम, लेकिन कानून की अनदेखी पर नाराजगी।

-केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भी बनाया प्रतिवादी।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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