चंडीगढ़ [जय सिंह छिब्बर]। AAP Punjab, आम आदमी पार्टी की ओर से पंजाब में शुरू की गई 'आम आदमी आर्मी' भर्ती मुहिम को राज्य में खास समर्थन नहीं मिल रहा है। गुटबाजी में बंटी लीडरशिप के कारण कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा हुआ है। मेंबरशिप के लिए सहयोग न मिलने से आप नेताओं की चिंता बढ़ गई है।

लोकसभा चुनाव में पार्टी को 13 लोकसभा हलकों में से केवल एक सीट पर जीत हासिल हुई। संगरूर से जीत के बाद पार्टी प्रधान भगवंत मान का पार्टी का कद तो बढ़ गया, लेकिन वे भी पार्टी में ऊर्जा का संचार नहीं कर पा रहे हैं। अगस्त में पार्टी ने ट्रिपल-ए फॉर्मूला के अंतर्गत 'आम आदमी आर्मी' मुहिम शुरू की गई थी। 

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हालांकि, भगवंत मान ने मेंबरशिप भर्ती का कोई लक्ष्य न रखने की बात कही थी, लेकिन पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बड़े स्तर पर सदस्यों को भर्ती करने का फैसला लिया था। इसके लिए 20 पन्नों की बुकलेट तैयार की गई और एक लोकसभा हलके में तीन ऑब्जर्वर यानि कुल 39 ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए थे।

सूत्रों के अनुसार निचले स्तर पर वॉलंटियर मेंबरशिप मुहिम में सहयोग नहीं दे रहे हैं। कई हलकों व जिलों में तो मेंबरशिप फॉर्म भी नहीं हैं। वॉलंटियरों का कहना है कि पार्टी नेता पुराने कार्यकर्ताओं पर ध्यान नहीं दे रहे। इससे उनमें निराशा का आलम है। लोकसभा चुनाव और विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण भी लोगों ने उनसे मुंह मोड़ लिया है।

छह विधायक बागी

आप से बागी हुए सुखपाल सिंह खैहरा ने छह जनवरी को पार्टी की प्राथमिक मेंबरशिप से इस्तीफा दे दिया था। खैहरा समेत पार्टी के छह विधायक बागी चल रहे हैं। सुनाम से विधायक अमन अरोड़ा पार्टी की बैठकों में शामिल होते हैं, लेकिन कई मुद्दों पर उन्होंने पार्टी से अलग स्टैंड लिया है। इस तरह पार्टी की गुटबाजी का प्रभाव पार्टी की मेंबरशिप मुहिम पर पड़ रहा है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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