चंडीगढ़, जेएनएन। ट्राईसिटी में बेघर कुत्तों द्वारा काट लिए जाने के छिटपुट मामले अक्सर आते रहते हैं। पीड़ितों में ज्यादातर छोटे बच्चे और बुजुर्ग अधिक होते हैं। इस बारे में विशेषज्ञों की राय है कि जागरूकता की कमी और कुत्तों को बेवजह परेशान किये जाने से भी ऐसी घटनाओं में वृद्धि हो रही है। उनको समय पर खाना-पानी न मिलना और नागरिकोंं की बेरुखी तो एक बड़ा कारण है ही। कुत्तों के व्यवहार विशेषज्ञ एवं सर्टिफाइड डॉग ट्रेनर, दिव्य दहिया का कहना है कि नासमझ लोगों के उकसाने से उत्तेजित या परेशान होकर अथवा किसी हमले से बचने के लिए कुत्ता काटने पर मजबूर हो सकता है। बीमार कुत्ता जरूर चिड़चिड़ाहट में किसी को भी काट सकता है। उसका इलाज होना चाहिए।

इन गलतियों को न करें
अनजान कुत्ता गुस्से में दिखे तो उससे नजरें न मिलाएं, उसके सामने झुकें नहीं, न ही उसे छूने की कोशिश करें। बस उससे दूर हट जाएं। कोई पालतू कुत्ता भी जब आपके पास आए तो विचलित न हों, हाथ न नचाएं, उसे सूंघने दें, शांत रहें। उसे आपको जानने का अवसर दें। इस दौरान उसे छूएं नहीं, न ही उससे दोस्ती जताने की कोशिश करें। कुछ सेकंड बाद वह खुद संतुष्ट होकर शांत बैठ जायेगा या चला जायेगा।
   
बच्चों को जागरूक करना बेहद जरूरी    
दहिया मानते हैं कि जागरूकता महत्वपूर्ण है। बच्चों को जानवरों के प्रकार और उनके साथ मिलजुल कर रहने का महत्व समझाएं। बच्चों को डराएं नहीं, जागरूक बनाएं। यदि आप बच्चों से सिर्फ यह कहेंगे कि कुत्ता काट लेगा, तो वे उसे देखते ही चीखने या भागने लगेंगे, जो कुत्ते के लिए खतरे का संकेत है और वो आक्रामक हो सकता है। कुत्तों से डरने वाले वयस्क भी अजीबो-गरीब उछलकूद करके स्थिति को बिगाड़ते हैं।
 
इन बातों पर करें गौर
कुत्ता पूंछ हिलाए तो इसका मतलब यह नहीं कि वो फ्रेंडली है। यदि उसकी पूरी बॉडी हिले तो समझिए वो दोस्ताना है। यदि शरीर अकड़ा रहे, सिर्फ पूंछ हिलाये और नजरें न मिला रहा हो तो मान कर चलें कि कुत्ता उत्तेजित है। भलाई इसी में है कि उससे दूर रहें। किसी भी हालत में एक कुत्ते को पत्थर या डंडा न मारें। यह मूर्खता अधिकांश लोग करते हैं, इसीलिए डॉग बाइट के मामले बढ़ रहे हैं। मारने-धमकाने से कुत्ता आक्रामक हो जाता है। उससे प्यार से पेश आएं। कुत्ते बहुत फ्रेंडली होते हैं।

ताकि कुत्ता काटने की घटना पर लगे रोक
दहिया का कहना हे कि कुत्तों की आक्रामकता कम करने के लिए उनकी नसबंदी, वेक्सीनेशन, खाने-पीने की व्यवस्था और दोस्ताना माहौल देना जरूरी है। यह काम न सरकार ठीक से कर रही है, न ही आम जनता, इसलिए समस्या बढ़ी हुई है। कुछ लोग कुत्तों को खाना-पानी देने लगते हैं तो कुछ बददिमाग लोग उसमें अड़ंगा डालते हैं। यदि हर दूसरे-तीसरे घर से थोड़ा बहुत खाना-पानी मिलता रहे, तो बेघर कुत्ते शांत रहेंगे। लोगों को पशु क्रूरता कानूनों का डर दिखाना भी जरूरी है, ताकि कुत्तों के प्रति उनका व्यवहार उचित रहे।
 
इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चे और बुजुर्ग अधिक छेड़ते हैं राह बैठे कुत्तों को, तभी बनते हैं शिकार
- मानवीय लापरवाही से होते हैं कुत्ते बीमार, रेबीज पीड़ित कुत्ते से दूर रहें
- डरे हुए कुत्ते को मारने पर वह हमला कर सकता है, उसे छेड़िए नहीं
- कुत्ते खाने व बैठने की जगह और मेटिंग टाइम में दखलंदाजी पसंद नहीं करते   
- कुत्तों को तंग न करें तो कम हो सकते हैं डॉग बाइट मामले
- कुत्ते को पत्थर या डंडा कभी न मारें। यह गैैरकानूनी और अनुचित हरकत है
- कुत्तों को कभी उनके इलाके से दूर न छोड़ें, इससे उनमें गुस्सा बढ़ता है
- कुत्ते हमेशा फ्रेंडली होते हैं, यह मनुष्य है जो स्वार्थी और क्रूर हो गया है। 

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Posted By: Vikas Kumar

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