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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राणा गुरजीत के विवाद के कारण लटका कैप्‍टन मंत्रिमंडल का विस्तार

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Fri, 02 Jun 2017 12:19 PM (IST)

रेत खदानों की नीलामी में सिंचाई व बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह का नाम आने के कारण कैप्‍टन अमररिंदर सिंह मंत्रिमंडल का विस्तार लटक गया है।

राणा गुरजीत के विवाद के कारण लटका कैप्‍टन मंत्रिमंडल का विस्तार
राणा गुरजीत के विवाद के कारण लटका कैप्‍टन मंत्रिमंडल का विस्तार

चंडीगढ़, [मनोज त्रिपाठी]। रेत खदानों की नीलामी में सिंचाई व बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह का नाम आने के बाद कैप्‍टन अमरिंदर सिंह मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल लटक गया है। इस विवाद से पहले विधानसभा सत्र से पूर्व मंत्रिमंडल का विस्तार तय माना जा रहा था। एक सप्ताह से प्रदेश सरकार राणा विवाद में ही उलझी हुई है।

 मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विवाद खत्म करने और सरकार की छवि को बरकरार रखते हुए जांच आयोग का गठन कर दिया है, लेकिन इसके बाद भी विपक्ष चुप नहीं है। रेत खदानों की नीलामी में राणा गुरजीत सिंह की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए बीते दस दिन से विपक्ष इस मामले काे उठा रहा है। उसके बाद से प्रदेश सरकार बैकफुट पर दिखती लग रही है। राणा के घिरने के करीब आठ दिन बाद सरकार ने इस मामले में एक सदस्सीय जांच आयोग का गठन करके अपना बचाव किया है।

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आयोग के गठन के बाद सरकार को उम्मीद थी कि मामला ठंडा पड़ जाएगा, लेकिन बीते दिन आयोग की जांच की शर्तों को तय करने के बाद विवाद ठंडा पड़ने की बजाय गरम हो गया है। विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का एक मौका मिल गया है कि आयोग की जांच की जो शर्तें तय की गई हैं उनमें से राणा के खिलाफ कोई आरोप बनते ही नहीं हैं।

आयोग केवल दो ठेकों की नीलामी और उसे लेकर उद्योग विभाग को अदा किए गए करोड़ों रुपये की जांच के अलावा जिन पांच बिंदुओं पर जांच करेगा उनमें पहले ही राणा को क्लीन चिट मिलती दिखाई दे रही है। विपक्ष की कोशिश है कि किसी भी प्रकार से इसी आरोप में सरकार को घेरकर रखा जाए और विधानसभा के बजट सत्र से पहले किसी भी कीमत पर इस मुद्दे को सूबे की सियासत से न खत्म होने दिया जाए।

कांग्रेस नेताओं में भी दो राय

कांग्रेस में भी इस विवाद को लेकर विधायकों व नेताओं में दो राय है कि राणा के खिलाफ जांच में सरकार को और सख्त रवैया अपनाना चाहिए या नहीं। कई कांग्रेसी विधायकों ने इस बारे में स्पष्ट तौर पर मुख्यमंत्री को अपनी राय से अवगत भी करवा दिया है और कई नेता व विधायक अपने-अपने संपर्क सूत्रों के जरिए मुख्यमंत्री तक अपनी राय भिजवा रहे हैं। हालांकि कैप्टन ने जिस तरीके से जांच आयोग का गठन किया है उसे लेकर कांग्रेसी भी पूरी तरह से समहत दिखाई नहीं दे रहे हैं।

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विधायकों की मंत्री पद पर निगाहें

पार्टी में राणा का अंदरखाते विरोध करने वाले विधायकों व नेताओं की कवायद है किसी भी प्रकार से अगर राणा पद से हटते हैं तो उनके स्थान पर किसी दूसरे को मौका मिलेगा और साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता भी साफ हो जाएगा। फिलहाल सरकार अभी मंत्रिमंडल विस्तार के मूड में नहीं है। यही वजह है कि मंत्री बनने का सपना देख रहे पार्टी विधायकों ने इस बाबत लॉबिंग और ज्यादा तेज कर दी है।