चंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे बेशक मंगलवार को आएंगे, लेकिन शनिवार को एग्जिट पोल के अनुमान आने के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेताओं की बाछें खिल गई हैं। उन्‍होंने पंजाब में 2022 में होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से नई रणनीति बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

आप विधायक व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने कहा कि पता नहीं क्यों लोग दिल्ली के चुनाव को पंजाब से जोड़ रहे हैं। पंजाब के हर शहर और गांव से लोगों के मुझे फोन आ रहे हैं। पार्टी समझ रही है कि लोगों के मन में काफी उत्साह है। लोग पंजाब में कांग्रेस और शिअद-भाजपा से निराश हो चुके हैं और बदलाव की सोच रहे हैं। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने काम करके दिखाए हैं। पंजाब के लोग भी चाहते हैं कि उसी तरह की सुविधाएं यहां भी हों, इसलिए लोगों की अपेक्षाएं हमसे बढ़ रही हैं। दिल्ली के नतीजों के बाद हम नई रणनीति तैयार करके पूरे प्रदेश में उतरेंगे।

प्रदेश के लोगों की अपेक्षाएं आम आदमी पार्टी से बढ़ीं : चीमा

ऐसा नहीं है कि आप की ही निगाहें दिल्ली चुनाव पर थीं, बल्कि कांग्रेस व शिअद-भाजपा की भी थीं। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आप को पारंपरिक पार्टियों के विकल्प के तौर पर लाने की मुहिम को जिस तरह से झटका लगा उसका फायदा कांग्रेस ने उठाया। लेकिन, तीन सालों के बाद कांग्रेस के प्रदर्शन से पंजाब के लोगों में भारी निराशा है। शिअद-भाजपा गठजोड़ भी अपनी जगह फिर से नहीं बना पाया है। पंजाब के आप नेताओं का कहा है कि अगर दिल्ली में आप को एग्जिट पोल के मुताबिक सीटें मिलती हैं तो पंजाब में इसका असर यकीनन दिखेगा। यह बात कांग्रेस के सीनियर नेता भी मान रहे हैं।

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की ओर से बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य व पानी को लेकर जिस तरह से काम किए गए हैं उसका असर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दिल्ली में प्रचार के दौरान दिए भाषणों पर भी नजर आया। कैप्टन ने इन्हीं चार मुद्दों पर अपना फोकस रखा और दावा किया कि बिजली, शिक्षा व स्वास्थ्य पर पंजाब ने दिल्ली से भी बेहतर काम किया है। यही नहीं, कई कैबिनेट मंत्री जो कैप्टन से नाराज चल रहे हैं वे भी गाहे-बगाहे इस बात पर जोर देते हैं कि हमें भी पंजाब के लोगों को सस्ती दरों पर बिजली, अच्छी स्कूली शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाएं देनी चाहिए।

प्रदेश में खराब है आप की स्थिति

उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी पंजाब में प्रमुख विपक्षी पार्टी है, लेकिन तीन सालों से उसकी स्थिति बिगड़ती जा रही है। पार्टी के आधा दर्जन विधायक या तो अलग गुट बना चुके हैं या फिर दूसरी पार्टियों में चले गए हैं। प्रदेश में पार्टी की वह हवा नहीं रह गई है जो 2017 के चुनाव से पहले थी। इसका असर लोकसभा के नतीजों पर भी देखने को मिला। 2014 के चुनाव में पंजाब में चार सीटें जीतने वाली आप 2019 में एक सीट पर सिमट गई। संगरूर से भगवंत मान चुनाव जरूर जीते, लेकिन अपने दम पर।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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