राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने ईधन से चलने वाले वाहनों पर लगाम लगाने के लिए तत्काल प्रभाव से इलेक्ट्रिक व्हीकल पालिसी को लागू कर दिया है। इससे चंडीगढ़ में तो इसका असर दिखाई देगा, लेकिन पंचकूला और मोहाली में इस तरह की कोई पालिसी नहीं होने के कारण वहां पर पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन चलते और बिकते रहेंगे।

पंचकूला और मोहाली से हर दिन डेढ़ से दो लाख वाहन चंडीगढ़ आते हैं। चंडीगढ़ में हरियाणा और पंजाब के कार्यालय है। उनके कर्मचारी मोहाली और पंचकूला से चंडीगढ़ में अपने वाहनों से आते हैं। चंडीगढ़ में साल 2026 तक ईंधन से चलने वाले वाहन के रजिस्ट्रेशन बंद होने का फायदा पंचकूला और मोहाली प्रशासन को मिलेगा। लोग वाहन खरीदने के बाद वहां से रजिस्ट्रेशन करवा लेंगे। ऐसे में वहां के प्रशासन की कमाई भी बढ़ेगी। ईंधन वाले वाहन के रजिस्ट्रेशन करने पर कुल कीमत का छह से आठ फीसद शुल्क जमा करवाना पड़ता है। ऐसे में लोगों का कहना है कि चंडीगढ़ को अकेले नहीं देखा जाना चाहिए। इलेक्ट्रिक व्हीकल पालिसी अकेले चंडीगढ़ में नहीं ट्राईसिटी में लागू होनी चाहिए तभी इस नीति का फायदा दिखेगा।

चंडीगढ़ में रहने वाले अधिकतर लोगों के रिश्तेदार और जानकार पंचकूला और मोहाली में रहते हैं। हर माह चंडीगढ़ में चार हजार से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड होते हैं। इनमें कारों की संख्या दो हजार के करीब होती है। नीति के अनुसार टारगेट पूरा होने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन पेट्रोल-डीजल से चलने वालों को रजिस्ट्रेशन नहीं करेगा। इस साल जल्द ही दोपहिया वाहन का रजिस्ट्रेशन बंद होने वाला है क्योंकि प्रशासन ने 35 फीसद इलेक्ट्रिक व्हीकल रजिस्टर्ड करने का टारगेट रखा है।

इस साल अब तक 60 फीसद से ज्यादा पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया रजिस्टर्ड हो चुके हैं। ऐसे में जल्द ही इनके रजिस्ट्रेशन पर पाबंदी लगने वाली है। फेस्टिवल सीजन में दोपहिया वाहन खरीदने वालों को रजिस्ट्रेशन के लिए अगले साल का इंतजार करना होगा। साल 2026 में सिर्फ कारों को बाकी सभी कैटेगरी के ईंधन से चलने वाले वाहनों की रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी।

मोहाली और पंचकूला में लागू होनी चाहिए पालिसी 

बलजिंदर सिंह फासवेक अध्यक्ष बलजिंदर सिंह बिट्टू का कहना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल ईधन से चलने वाले वाहनों से महंगे हैं। इंसेंटिव मिलने के बाद भी इनकी कीमत ज्यादा पड़ेगी। यूटी प्रशासन को पालिसी को लागू करने के लिए जो पांच साल का प्लान बनाया है, असल में उसकी सीमा 10 साल की बनाई जानी चाहिए। अभी शहर में चार्जिंग सिस्टम भी कम है। पहले इनकी संख्या बढ़नी चाहिए। उसके बाद टारगेट बढ़ाए जाने चाहिए। मोहाली और पंचकूला में इस नीति को लागू किया जाना चाहिए, नहीं तो नीति के कारण जो चंडीगढ़ में इसका प्रभावशाली असर दिखना चाहिए वह नहीं दिखेगा।

रेंट एग्रीमेंट से वाहन हो सकते हैं रजिस्टर्ड

वाहन रजिस्टर्ड करवाने के लिए चालक के पास रेजिडेंट प्रूफ होना चाहिए लेकिन जिन लोगों के पास यह प्रूफ नहीं होते हैं तो रेंट एग्रीमेंट की प्रति लगाकर वाहन रजिस्टर्ड करवा लेते हैं। इसके साथ ही चंडीगढ़ में एक लाख से ज्यादा लोग और युवा ऐसे है जो कि चंडीगढ़ में नौकरी और पढ़ने के लिए आते हैं। ऐसे लोग अपने मूल राज्य से वाहन खरीदकर शहर की सड़कों पर वाहन चलाते हैं। ऐसे लोगों को इलेक्ट्रिक व्हीकल चलाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।