चंडीगढ़, जेएनएन। अगर पांच साल से पहले कोई सड़क टूटती है तो इसके लिए इंजीनियर्स पर कार्रवाई होगी। यह निर्णय नगर निगम की सदन की बैठक में लिया गया। कमिश्नर केके यादव ने स्पष्ट कहा कि पंजाब में सड़क की कारपे¨टग आठ साल बाद होती है, लेकिन चंडीगढ़ में इसका कार्यकाल पांच साल का है। ऐसे में निर्धारित समय से पहले सड़क टूटने पर कार्रवाई अवश्य की जाएगी।

मनीमाजरा के पार्षद जगतार जग्गा ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड से फौजी ढाबा को जाने वाली प्रमुख सड़क को कारपेटिंग हुए 11 माह ही हुए हैं, लेकिन यह टूट रही है। जिस पर कमिश्नर केके यादव ने जांच के आदेश दे दिए हैं। कमिश्नर ने वर्तमान में उन सभी सड़कों की सूची भी मांग ली है, जोकि पांच साल से पहले ही टूट गई हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब सड़क टूटने पर संबंधित इंजीनियर्स की जिम्मेदारी तय की गई है।

दो साल में 47 करोड़ के काम अलॉट

सदन में कमिश्नर ने बताया कि साल पिछले दो साल में 47 करोड़ रुपये की सड़कों के काम अलॉट हो चुके हैं जिनका काम फंड न होने के कारण शुरू नहीं हो पा रहे थे लेकिन अब सड़कों के लिए प्रशासन ने 50 करोड़ रुपये का फंड दे दिया है। ऐसे में अब सड़कों की कारपेटिंग का काम शुरू करने के आदेश दे दिया गया है। सबसे पहले उन सड़कों की हालत सुधारी जाएगी जिनकी ज्यादा खस्ता हालत है। कमिश्नर केके यादव ने सदन में भी पार्षदों को कहा कि वह अपने एरिया की सड़कों की कारपेटिंग की प्राथमिकता तय करे। उन्होंने अभी सिर्फ एक माह ही सड़कों की कारपेटिंग का काम हो पाएगा। मालूम हो कि इस समय शहर की सड़कों की हालत काफी खस्ता है। प्रशासन की ओर से फंड आने के बावजूद पूरे शहर की सड़कों की कारपेटिंग नहीं हो पाएगी। कमिश्नर ने यह भी आदेश दिया है कि सड़कों की जब कारपेटिंग हो तो क्वालिटी कंट्रोल टीम को भी निर्माण सामग्री की जांच करनी चाहिए। किसी भी तरह की कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सदन में कमिश्नर ने कहा कि प्रशासन की ओर से सड़कों के लिए 50 करोड़ रुपये आए हैं लेकिन अधिकारियों की इतनी क्षमता नहीं है कि वह यह राशि एक माह में खर्च कर सके। समय पर काम न करने वाले ठेकेदारों पर की जाए कार्रवाई कमिश्नर ने इंजीनियर्स को कहा कि समय पर काम न करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए। पार्षदों ने जब कहा कि ठेकेदारों द्वारा किए गए काम की राशि जारी नहीं हो रही है तो इस पर कमिश्नर ने अधिकारियों से पूछा जिसके बाद पता चला कि सिर्फ ढाई करोड़ रुपये का भुगतान रुका हुआ है। जो ठेकेदार समय पर काम नहीं कर रहे हैं, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।

आठ करोड़ की जमीन दी 15 हजार की लीज पर, पार्षदों ने कहा-सीबीआइ जांच हो

सदन में औद्योगिक क्षेत्र में बनाए गए मलबा प्रोसे¨सग प्लांट का मामला भी गरमाया। पूर्व मेयर अरुण सूद ने कहा कि इस प्लांट को लगाने का फैसला सदन में पीपीपी मोड पर चलाने के लिया गया था। लेकिन अनुबंध कमेटी ने इस प्लांट को खुद चलाने का फैसला पिछले माह ले लिया है, जबकि अगर कुछ बदलाव करना था तो यह एजेंडा सदन में आना चाहिए था। सूद ने कहा कि बिना सदन की मंजूरी के अधिकारियों ने अपने स्तर पर ही कंपनी को आठ करोड़ की जमीन 15 हजार रुपये माह के लीज पर दे दी थी। तीन साल के रखरखाव करने की शर्त हटा कर एक साल कर दी गई थी। कमिश्नर केके यादव ने भी माना कि टेंडर की शर्त में बदलाव करके खामियां बरती गई। जिस पर कमिश्नर केके यादव ने कहा कि अतिरिक्त कमिश्नर एसके जैन को इस मामले की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि पार्षदों ने कहा कि इस मामले की सीबीआइ जांच होनी चाहिए। ऐसे में कमिश्नर ने यह भी कहा कि क्या उनके जांच अधिकारियों पर विश्वास नहीं है। जिसके बाद यह फैसला लिया गया कि जांच रिपोर्ट अगली सदन की बैठक में रखी जाएगी। मालूम हो कि इस प्लांट में शहर के मलबे को प्रोसेस करके टाइल्स बनाई जाती है।

13 करोड़ 74 लाख रुपये का खर्चा बढ़ा

सदन की बैठक में नगर निगम के सभी विभागों का नए सिरे से गठित करने का प्रस्ताव पास किया गया। सभी विभागों में कर्मचारी बढ़ाए गए। कमिश्नर ने बताया कि कई विभागों में नए पद भरती किए जाएंगे। इससे 13 करोड़ 74 लाख रुपये का खर्चा हर साल बढ़ेगा।

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!