जेएनएन, चंडीगढ़। भावी पीढ़ी को कैसी शिक्षा देनी चाहिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए शिक्षाविदों के क्या सुझाव हैं, इसी विषय पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की प्रांतीय इकाई सर्वहितकारी शिक्षा समिति पंजाब की ओर से सेवा धाम सेक्टर -29 में शनिवार को शैक्षिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्या भारती उत्तर क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय नड्डा ने विशेष मेहमान और न्यूरो वैज्ञानिक डॉ. अक्षय आनंद ने मुख्य वक्ता के तौर पर शिरकत की। इसके अलावा शहर के कई शिक्षाविदों ने गोष्ठी में हिस्सा लिया।

विद्या भारती उत्तर क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय नड्डा ने बताया कि भविष्य की जरूरतों के हिसाब से शिक्षा समय की जरूरत है। मौजूदा शिक्षा प्रणाली भी बेहतर है, लेकिन हर मौजूदा परिस्थिति में और बेहतर होने की गुंजाइश रहती है। नड्डा के मुताबिक 1948 से ही अनेक शिक्षा आयोगों का गठन शुरू हुआ। तभी से चर्चा चल रही है कि भारत विश्वशक्ति बनने जा रहा है, ऐसे में उसकी जरूरतें भी बदल रही हैं। उन्हीं जरूरतों को देखते हुए नई शिक्षा नीति की जरूरत है।

सर्वहितकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल डेराबस्सी के प्रधानाचार्य डॉ. गौरव सच्चर ने इसी विषय से जुड़ी एक कविता सुनाई। इसके बाद मुख्य वक्ता डॉ. अक्षय आनंद ने नई शिक्षा नीति कैसी हो.. विषय पर अपने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से रट्टा नीति को हटाया जाए। शिक्षा बच्चों को तार्किक बनाए ऐसी शिक्षा नीति का विकास हो। अध्यापकों को अपने विषय का पूरा ज्ञान हो। इसके बाद वहां मौजूद शिक्षाविदों ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2019 पर अपने सुझाव दिए।

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