चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में ईडी के चार अफसरों के खिलाफ शिकायत, तलाशी के समय कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप
चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में ईडी के चार अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। इसमें एक सरकारी आवास की ...और पढ़ें

आम आदमी पार्टी पंजाब के महासचिव डाॅ. सन्नी सिंह आहलूवालिया ने ईडी अफसरों की दी शिकायत।
HighLights
चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में ईडी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत।
सरकारी आवास की तलाशी में कानूनी प्रक्रिया उल्लंघन का आरोप।
आम आदमी पार्टी नेता ने जांच की मांग की।
अजय अग्निहोत्री, मोहाली। चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चार अधिकारियों के शिकायत दर्ज करवाई गई है। शिकायत में सेक्टर-39ए स्थित एक सरकारी आवास में तलाशी के समय अनियमितताओं और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता आम आदमी पार्टी पंजाब के महासचिव और मोहाली के पार्षद डाॅ. सन्नी सिंह आहलूवालिया ने तलाशी की कार्रवाई के कानूनी आधार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि उनकी गैर-मौजूदगी में सरकारी आवास का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया और तलाशी ली गई। शिकायत के अनुसार, संबंधित आवास को अमरिंदर सिंह मल्ही से संबंधित बताया गया था।
तलाशी और जब्ती के रिकॉर्ड की मांग
शिकायतकर्ता ने तलाशी के लिए जारी अधिकृत आदेशों और कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों का पूरा ब्योरा उपलब्ध करवाने की मांग की है। इसमें तलाशी के आधार, जब्त किए गए दस्तावेजों की पूरी सूची और कार्रवाई की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं।
शिकायत में यह भी आपत्ति जताई गई है कि तलाशी के दौरान कथित तौर पर कुछ ऐसे दस्तावेज जब्त किए गए, जिनका कार्रवाई के उद्देश्य से संबंध स्पष्ट नहीं है।
कानूनी प्रविधानों के तहत जांच की मांग
डॉ. आहलूवालिया ने शिकायत में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत तलाशी एवं जब्ती से जुड़े कानूनी प्रविधानों का हवाला दिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड तलब करने और कथित अनियमितताओं की जांच करवाने की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान किसी कानूनी उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित कानूनी प्राधिकारी द्वारा तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना है।
