चंडीगढ़ [राजेश ढल्ल]। Ease of living Index 2020: केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा वीरवार को ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स रैंकिंग-2020 के लिए जिन शहरों की सूची जारी की गई है उसमेंं चंडीगढ़ टाप-10 से बाहर हो गया है। वर्ष 2018 में रहने योग्य शहरों के लिए जो 111 शहरोंं की सूची जारी हुई थी उसमें चंडीगढ़ दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की सूची पर पांचवेंं पायदान पर था, लेकिन इस बार चंडीगढ़ अपनी इस स्थिति को नहीं बचा पाया है। पंजाब का भी कोई शहर टाप 10 में स्थान नहीं बना पाया।

वीरवार को जारी सूची के अनुसार चंडीगढ़ का 29वें स्थान पर है। चंडीगढ़ को इस प्रतियोगता में केंद्र सरकार ने 54.40 अंक दिए हैं। केंद्र सरकार ने 10 लाख से ज्यादा की आबादी वाले क्षेत्रों के लिए अलग और 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए अलग से अंक और स्थान तय किए हैं। परिणाम घोषणा से पहले शहरवासियों से भी राय ली गई है। शहरवासियों का फीडबैक ज्यादा अच्छा न होने के कारण चंडीगढ़ पांचवें स्थान से खिसकर 29वें स्थान पर पहुंच गया है। चंडीगढ़ की स्थिति बिगड़ने पर प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी भी हैरान हैंं, जबकि चंडीगढ़ को सिटी ब्यूटीफुल का भी दर्जा प्राप्त है।

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पंजाब का भी कोई शहर टाप-10 में शामिल नहीं

मंत्रालय के द्वारा जारी इस सूची में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में बेंगलुरू को देश का सबसे अच्छा रहने योग्य वाला शहर माना है, जिसमें यह शहर नंबर वन पर है। 10 लाख से कम की जनसंख्या वाले शहरों में शिमला सूची में नंबर वन पर है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुुरी की तरफ से यह रिपोर्ट जारी की गई है। दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में टाप-10 में पंजाब व हरियाणा का भी कोई शहर शामिल नहीं है। दस लाख से कम वाले शहरों में पंजाब का कोई शहर टाप-10 मेंं शामिल नहीं है, जबकि इस कैटगरी में हरियाणा का गुरुग्राम टाप-10 में शामिल है।

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सर्वे के दौरान सभी शहरों में मंत्रालय द्वारा यह चेक किया गया कि शहरों में रहने के लिए साधन और सुविधाएं कैसी हैंं। इसके साथ ही शहर में विकास के कामों और प्रोजेक्ट्स को भी देखा गया। इस बात की भी पड़ताल की गई कि विकास कार्यों का इन शहरों की जनता के जीवन पर कितना असर पड़ रहा है।

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मालूम हो कि इस समय शहर में लोगों की सुविधा के लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं चल रहा है। इस समय शहर की सड़कों की हालत सबसे ज्यादा खस्ता है। जगह-जगह गड्ढे पड़े हुए हैं। साल 2018 में ही पहली बार यह प्रतियोगिता शुरू की गई थी। इस रैकिंग में पिछड़ने के कारण एक बार फिर से कांग्रेस को भाजपा और प्रशासन के खिलाफ सवाल उठाने का मौका मिल गया है।

इस आधार पर घोषित किए गए हैं स्थान

केंद्र सरकार की ओर से जो 111 शहरों की सूची जारी की गई है उसमेंं मुख्य तौर पर तीन आधार देखे गए हैं। पहला रहने की गुणवत्ता, दूसरा लोगों की आर्थिक योग्यता और तीसरा विकास की गति। इसके साथ-साथ करीब 50 अन्य बिंदुओं को स्टडी किया गया है। इन सबको स्टडी करने के बाद ही नंबर तय किए गए हैं। अंक और स्थान तय करने में लोगों के फीडबैक की अहम भूमिका रही है। यह सर्वे 19 जनवरी से मार्च 2020 तक कराया गया। सर्वे के लिए शहरों के लिए गवर्नेंस, संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सेफ्टी, आर्थिक हालत, रोजगार, कूड़ा प्रबंधन, सीवर प्रबंधन, पर्यावरण प्रदूषण का स्तर, आवासीय सुविधाएं, भूमि का उपयोग, बिजली आपूर्ति, परिवहन, पेयजल की आपूर्ति और नागरिकों के लिए पार्क स्थलों को भी देखा गया है।

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Edited By: Kamlesh Bhatt