विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गुरुग्राम में DLF में अवैध निर्माण पर नगर निगम नहीं, DTCP चला सकेगा बुलडोजर; क्षेत्राधिकार का विवाद खत्म

Published: Fri, 25 Sep 2026 07:27 PM (IST)

गुरुग्राम की डीएलएफ कॉलोनियों में अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई का अधिकार नगर एवं ग्राम ...और पढ़ें

गुरुग्राम की पाॅश डीएलएफ काॅलोनियों में नियमों के विपरीत किए निर्माण पर सख्ती। (सांकेतिक फोटो)

गुरुग्राम की पाॅश डीएलएफ काॅलोनियों में नियमों के विपरीत किए निर्माण पर सख्ती। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. डीएलएफ गुरुग्राम में अवैध निर्माण पर डीटीसीपी का अधिकार बरकरार।

  2. हाईकोर्ट ने नगर निगम सीमा में डीटीसीपी की शक्तियां स्पष्ट कीं।

  3. फेज 1-5 में अवैध निर्माण और व्यावसायिक उपयोग पर कार्रवाई।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। गुरुग्राम की पाॅश डीएलएफ काॅलोनियों में नियमों के विपरीत किए गए निर्माण और आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है।

अदालत ने कहा है कि किसी लाइसेंसशुदा काॅलोनी के नगर निगम की सीमा में शामिल हो जाने से नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग (डीटीसीपी) की वैधानिक शक्तियां समाप्त नहीं हो जातीं।

यानी डीएलएफ फेज-1 से 5 में भवन नियमों के उल्लंघन पर डीटीसीपी भी कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है। इससे लंबे समय से चले आ रहे अधिकार क्षेत्र के विवाद का रास्ता साफ हुआ है।

मामला डीएलएफ फेज-1 से 5 में भवन निर्माण और संपत्तियों के उपयोग से संबंधित है। विभाग ने इन काॅलोनियों में व्यापक सर्वे कराया था। इसमें कुल 14 हजार 757 भूखंडों को शामिल किया गया। इनमें 11 हजार 8 सामान्य श्रेणी और 3,749 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के भूखंड बताए गए।

सर्वे के दौरान आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने, स्वीकृत अधिकतम फर्श क्षेत्र अनुपात से अधिक निर्माण करने और स्वीकृत सीमा से अतिरिक्त मंजिलें बनाने जैसे मामले सामने आए। विभाग ने ऐसे उल्लंघनों को गैर-समायोज्य श्रेणी में रखा। इसके बाद संबंधित संपत्ति मालिकों और कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए गए।

सीलिंग, तोड़फोड़ और प्राथमिकी तक की कार्रवाई

कुछ मामलों में संपत्ति बहाली के आदेश के साथ सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की गई। गंभीर मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी अपनाई गई। इसके बाद प्रभावित प्लाॅट मालिकों और कब्जाधारियों ने हाई कोर्ट का रुख किया।

उनकी प्रारंभिक आपत्ति थी कि डीएलएफ की लाइसेंसशुदा काॅलोनियां अब नगर निगम की सीमा में हैं, इसलिए भूखंडों पर भवन नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार नगर निगम के पास होना चाहिए।

हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि नगर निगम सीमा में शामिल होना अपने आप में डीटीसीपी की शक्तियों को खत्म नहीं करता। विभाग को लाइसेंसशुदा कॉलोनियों में भवन निर्माण और भू-उपयोग से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार बना रहता है।

5,099 मामलों में चिह्नित हुए उल्लंघन

इस विवाद की पृष्ठभूमि वर्ष 2009 से चली आ रही है। हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान प्रभावित पक्षों को अपनी आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया। दिसंबर 2025 में सार्वजनिक सूचना जारी होने के बाद चिह्नित 5,099 उल्लंघनकर्ताओं में से 763 ने आपत्तियां दाखिल कीं। डीटीसीपी के प्रवर्तन अधिकारियों ने इन आपत्तियों पर कारणयुक्त आदेश पारित किए।