चंडीगढ़ [सुमेश ठाकुर]। देश भर में करीब 2.6 करोड़ दिव्यांग है जिसमें से 22 हजार दिव्यांग शहर में रह रहे हैं। यह दिव्यांग अलग-अलग तरह के हैं। किसी की दिव्यांगता को हम देख सकते है जबकि कुछ की दिव्यांगता देखी नहीं जा सकती उसे केवल महसूस किया जा सकता है। यह कहना है गवर्नमेंट रिहेबिलिटेशन इस्टीट्यूट फॉर इंटेलेक्चुअल डिसेएबेलिटी (ग्रिड) सेक्टर-31 की ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. प्रीति अरूण का। विश्व दिव्यांग दिवस पर ग्रिड की तरफ से दिव्यांग जागरूकता के लिए ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। जिसमें ग्रिड के स्टूडेंट्स के अभिभावकों के साथ शहर के लोगों को भी जोड़ा गया।

वेबिनार में बोलते हुए डॉ. प्रीति अरूण ने कहा कि जिस दिव्यांगता को हम देख नहीं सकते उसका हम मजाक उड़ाते है या फिर उन्हें नजरअंदाज करते है। जो कि पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि हम इन लोगों को समाज में अपने साथ चलने का मौका दें ताकि वह सकारात्मक महसूस कर सके। 1992 से इस दिन को मनाया जा रहा है लेकिन उसके बाद भी आज तक समाज में उतनी जागरूकता नहीं फैल पाई है जितनी की जरूरत है।

कोरोना के चलते नहीं हो सकी खेल प्रतियोगिताएं

ग्रिड सेक्टर-31 बौद्धिक दिव्यांगता को आश्रय देता है। हर साल विश्व दिव्यांग दिवस को मनाने के लिए खेल प्रतियोगिता आयोजित कराता था जिसमें ग्रिड के स्टूडेंट्स अपनी-अपनी प्रतिभा को पेश करते थे लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन नहीं हो सका है। इस मौके पर बोलते हुए स्नेहलता ने बताया कि हमें दुख है कि इस बार खेल प्रतियोगिताएं नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि हर दिव्यांग के अंदर कुछ प्रतिभा होती है जिसे पहचानने की जरूरत है। जो बच्चे किसी सेंटर में पहुंच जाते है वह तो निखर जाते है जबकि अन्य समाज में पूरी तरह से पिछड़ जाते है। उन्होंने कहा कि आम समाज के लोगों को प्रयास करने की जरूरत है।

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