24 सितंबर को कोर्ट में खुलेगा DIG भुल्लर रिश्वत कांड का राज!, शिकायतकर्ता पहली बार होंगे पेश
पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े 8 लाख रुपये के रिश्वतकांड का सच 24 सितंबर को ...और पढ़ें

सीबीआई ने पिछले साल तत्कालीन डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को गिरफ्तार किया था। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
शिकायतकर्ता आकाश बत्ता 24 सितंबर को देंगे गवाही।
डीआईजी भुल्लर रिश्वतकांड का सच अब आएगा सामने।
सीबीआई अदालत में आरोपितों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
रवि अटवाल, चंडीगढ़। पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े आठ लाख रुपये रिश्वतकांड का पूरा सच अब 24 सितंबर को सामने आएगा। शिकायतकर्ता मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी आकाश बत्ता पहली बार चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में गवाही देने पहुंचेंगे।
अदालत ने बत्ता को समन जारी किया है। रिश्वत मामले में आरोप तय होने के बाद अब शिकायतकर्ता की गवाही मुकदमे की अहम कड़ी मानी जा रही है। सीबीआई के अनुसार, बत्ता ने शिकायत दी थी कि एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे आठ लाख रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी।
शिकायत के आधार पर सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन डीआईजी भुल्लर और बिचौलिये कृष्णु शारदा को गिरफ्तार किया था। अब अगर बत्ता ने भुल्लर और बिचौलिये के खिलाफ बयान दिया तो दोनों आरोपितों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, सीबीआई के लिए भी शिकायतकर्ता को पुराने बयानों पर कायम रखना बड़ी चुनौती होगा।
भुल्लर के घर से मिले थे साढ़े सात करोड़ कैश
पिछले साल सीबीआई ने भुल्लर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनके सेक्टर-40 स्थित घर पर छापेमारी की गई थी। सीबीआई ने वहां से करीब साढ़े सात करोड़ रुपये कैश, करीब ढाई किलो सोना और महंगी घड़ियां बरामद की थीं।
सीबीआई ने भुल्लर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अलग मामला भी दर्ज किया था। प्रवर्तन निदेशालय ने भी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच शुरू की थी।
आरोपमुक्त करने की अर्जी हो चुकी खारिज
इस मामले में भुल्लर और कृष्णु शारदा ने सीबीआई अदालत में आरोपमुक्त किए जाने की अर्जी दाखिल की थी। दोनों की ओर से सीबीआई की कार्रवाई और अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिस्चार्ज एप्लीकेशन खारिज कर दी थी। दोनों आरोपित इस समय जेल में हैं। जमानत के लिए भुल्लर को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली।
