चंडीगढ़, [राजेश ढल्ल]। पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन के आप के उम्मीदवार बनने से लोकसभा चुनाव के समीकरण बदल गए हैं। वहीं, कांग्रेस और भाजपा ने भी धवन के मैदान में आने से इसे गंभीरता से लिया है। लेकिन यह दोनों दल तय नहीं कर पा रहे हैं कि धवन के चुनाव लड़ने से किसको फायदा होगा और किसको नुकसान। जबकि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धवन के आप पार्टी से चुनाव लड़ने पर दोनों ही दलों को नुकसान है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि किस दल को ज्यादा नुकसान होगा और किसे कम। धवन ने सोमवार से अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। जबकि कांग्रेस और भाजपा से अभी यह तय नहीं है कि कौन उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा। ऐसे में धवन को इसका भी चुनाव प्रचार के दौरान फायदा मिलेगा।

धवन के दोनों दलों के नेताओं से हैं संबंध

पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन अपने राजनीतिककरियर में कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों में रह चुके हैं। ऐसे में दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ धवन के संबंध अच्छे हैं। इसका फायदा भी उनको मिल सकता है। कांग्रेस और भाजपा की गुटबाजी का भी होगा फायदा कांग्रेस और भाजपा के नेताओं में भारी गुटबाजी है। कांग्रेस में पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी का गुट है। ये दोनों ही कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, जबकि अब पूर्व मेयर पूनम शर्मा ने भी मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मेयर पूनम शर्मा इस समय शहर में पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्ध की धर्मपत्नी नवजोत कौर सिद्ध को चुनाव लड़वाने की लॉबिंग कर रही हैं। पूर्व मेयर पूनम शर्मा अगले दिनों में नवजोत कौर का एक कार्यक्रम भी करवाने जा रही हैं। ऐसे में किसी एक को टिकट मिलने पर दूसरे गुट के नेता नाराज हो जाएंगे। धवन को उम्मीद है कि इसका भी उन्हें फायदा मिल सकता है। जबकि पवन बंसल को 1992 से कांग्रेस की टिकट मिलती आ रही है।

भाजपा इस समय तीन गुटों में

भाजपा इस समय भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन, सांसद किरण खेर और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन गुट में बंटी हुई है। इस गुट के कार्यकर्ता और समर्थक पार्टी से ज्यादा अपने नेता को तवज्जो देते हैं। हरमोहन धवन सभी गुटों के कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं। ऐसे में धवन को इनसे भी फायदा मिलने की उम्मीद है। धवन बसपा पार्टी में भी रह चुके हैं। लेकिन गुलपनाग के गायब रहने का भी झेलना होगा विरोध पिछले लोकसभा चुनाव में आप ने शहर में गुलपनाग को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी ने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किए, लेकिन उसके बाद गुलपनाग शहर में नहीं दिखी। कांग्रेस और भाजपा चुनाव में इसे भी मुद्दा बनाएगी। इसका भी विरोध आप को चुनाव के दौरान झेलना होगा। हालांकि आप का मानना है कि धवन का अपना भी निजी वोट बैंक है, जिसका फायदा आप को मिलेगा।

पहले से ज्यादा मार्जिन से जीतेगी भाजपा: टंडन

भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन का कहना है कि धवन के मैदान में आने से भाजपा के लिए कोई चैलेंज नहीं है। धवन जो वोट लेकर जाएंगे, वह वोट कांग्रेस पार्टी के ही होंगे, क्योंकि भाजपा एक विचारधारा से जुड़ी पार्टी है। विचारधारा से जुड़े हुए लोग पार्टी को कभी भी नहीं छोड़ते हैं। अगला लोकसभा चुनाव भी भाजपा ही पहले से ज्यादा मार्जिन से जीतेगी।

शहर में आप का कोई आधार नहीं: छाबड़ा

कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का कहना है कि शहर में आम आदमी पार्टी का कोई आधार नहीं है। लोगों को भी पता है कि केंद्र में आप की सरकार नहीं बनने वाली है। ऐसे में कांग्रेस का मुकाबला सिर्फ भाजपा के साथ है। धवन के आप का उम्मीदवार बनने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। पिछले लोकसभा चुनाव से आधे वोट भी आप को नहीं पड़ने वाले।

भाजपा व कांग्रेस से जनता तंग: आप

आप के लोकसभा उम्मीदवार हरमोहन धवन का कहना है कि शहरवासी कांग्रेस और भाजपा दोनों से तंग आ चुकी है। उनका कहना है कि जब वे शहर के सांसद बने थे, तो शहर के लिए काफी कुछ किया था। आज तक कोई सांसद उतना काम नहीं कर पाया है। चुनाव जीतने के बाद पहले से ज्यादा काम किया जाएगा।

नहीं मिला तराजू, तोलने के लिए लाए गए लड्डू 

आप ने सेक्टर-22 में पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन को लड्डू से तोलने की घोषणा की थी। लड्डू भी मंगवा लिए गए, लेकिन समर्थक तोलने के लिए तराजू की व्यवस्था नहीं कर पाए, जिस कारण तोलने के लिए मंगवाए गए लड्डू लोगों में बांटे गए। इस मौके पर भाजपा नेता अरुण गोयल अपने समर्थकों के साथ आप में शामिल हुए। अरुण गोयल उर्फ गोगा लंबे समय से भाजपा के साथ जुड़े हुए थे। गोगा ने कहा कि भाजपा अपना चाल चरित्र और चेहरा को छोड़कर एक भटकी हुई पार्टी बन गई है। धवन ने कहा कि अगर वह चुनाव जीतते हैं, तो दिल्ली की तर्ज पर शिक्षा और स्वास्थ्य पर कार्य किया जाएगा। मौके पर आप के प्रवक्ता योगेश सैनी ने कहा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा के कई नेता आप में शामिल होने जा रहे हैं।

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