जेएनएन, चंडीगढ़। डीजीपी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विशेष अर्जी देकर आरोप लगाए हैं कि जगदीश भोला ड्रग्स मामले की जांच को दबाने के लिए उन्हें डीजीपी सुरेश अरोड़ा व डीजीपी इंटेलिजेंस दिनकर गुप्ता आइजी एलके यादव के जरिए इंदरप्रीत चड्ढा आत्महत्या मामले में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।

चट्टोपाध्याय के आरोपों के बाद पंजाब पुलिस के उच्च अधिकारियों का शीतयुद्ध भी खुलकर मैदान में आ गया है। उन्होंने चीफ खालसा दीवान के पूर्व अध्यक्ष चरणजीत सिंह चड्ढा के बेटे इंदरप्रीत चड्ढा की आत्महत्या मामले में खुद को बेकसूर बताते हुए पूरे मामले की जांच सीबीआइ से करवाने की मांग की है।

चट्टोपाध्याय की अर्जी पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर चड्ढा आत्महत्या केस में उनके खिलाफ जांच पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा है कि इस मामले में पुलिस अन्य आरोपितों के खिलाफ अपनी जांच जारी रख सकती है और 23 अप्रैल को जांच की रिपोर्ट अदालत में पेश करे।

चट्टोपाध्याय की अर्जी पर हाईकोर्ट में जिरह करते हुए उनके वकील अनुपम गुप्ता ने कहा इंदरप्रीत चड्ढा की आत्महत्या मामले में चट्टोपाध्याय का नाम उनके एनआरआई कमीशन सदस्य के कार्यकाल से जोड़ा जा रहा है। एनआरआइ कमीशन की शिकायत पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आरके गर्ग ने चड्ढा के खिलाफ आदेश सुनाए थे। उनका उसमें कोई रोल नहीं था।

उन्होंने चड्ढा आत्महत्या में लगे आरोपों को झूठा करार देते हुए अर्जी में कहा है कि डीजीपी सुरेश अरोड़ा और दिनकर गुप्ता इंदरप्रीत चड्ढा की आत्महत्या के मामले की जांच को देख रहे हैं जबकि जांच के लिए गठित एसआईटी चीफ आइजी क्राइम एलके यादव हैं। अरोड़ा व गुप्ता एसआईटी चीफ यादव के माध्यम से उन्हें परेशान कर रहे हैं। यादव अब तक उन्हें दो बार दो सवालों की लिस्ट भेज चुके हैं, जिस पर उनसे बार-बार जवाब मांगा जा रहा है।

एक डीजीपी की बेनामी संपत्ति का जिक्र

चट्टोपाध्याय ने कहा है कि उन्हें सवाल बाद में मिलते हैं लेकिन मीडिया को पहले ही दे दिए जाते हैं। पत्रकार उनसे पहले ही सवाल पूछने लगते हैं। उन्होंने अपनी अर्जी में एक डीजीपी की एक बेनामी संपत्ति का भी जिक्र किया है, लेकिन यह किस डीजीपी की है इसका खुलासा नहीं किया।

इसलिए जांच हो गई है तेज

चट्टोपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया कि चड्ढा की आत्महत्या के मामले में उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई तब से ज्यादा तेज हो गई है जबसे उन्होंने ड्रग्स कारोबार में पुलिस अधिकारियों की भूमिका संबंधी जांच की पहली स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंपी है। चट्टोपाध्याय के वकील अनुपम गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि इंदरप्रीत चड्ढा ने बीती 3 जनवरी को आत्महत्या की थी। उसने सुसाइड नोट में आत्महत्या का कारण अपने पिता का स्कूल प्रिंसिपल संग आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के चलते हुई आत्मग्लानि को बताया था।

चट्टोपाध्याय के खिलाफ जांच को सवालों के कठघरे में खड़ा करते हुए गुप्ता ने कहा कि अगर एनआरआइ कमीशन का सदस्य होने के नाते चड्ढा आत्महत्या मामले में चट्टोपाध्याय के खिलाफ जांच हो रही है तो इस मामले में हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस आरके गर्ग का नाम भी आ सकता है जिन्होंने चड्ढा के खिलाफ आदेश सुनाए थे।

क्या है सील बंद लिफाफे में

चटोपाध्याय ने अदालत को शुक्रवार को सीलबंद लिफाफे में कुछ दस्तावेज सौंपे हैं। आशंका जताई जा रही है कि सीलबंद लिफाफों में चटोपाध्यान ने भोला ड्रग्स व चड्ढा आत्महत्या मामले से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दिए होंगे।

कैसे जुड़े तार, क्या है भोला ड्रग्स मामले की भूमिका

पुलिस के उच्च अधिकारियों में छिड़ी जंग में भोला ड्रग्स मामला भी जुड़ गया है। एसएसपी मोगा राजजीत ने कुछ महीने पहले एसटीएफ चीफ हरप्रीत सिंह सिद्धू के खिलाफ सरकार को लिखित में शिकायत की थी। शिकायत में लिखा कहा था कि सिद्धू उन्हें ड्रग्स रैकेट में फंसाना चाहते हैं।

मामले में एसटीएफ ने इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह को पकड़ा था। इंद्रजीत कुछ सालों तक राजजीत के साथ कार्यरत रहे थे। जालंधर व तरनतारन में तैनाती के दौरान इंद्रजीत भी उनके साथ बतौर सीआईए इंचार्ज तैनात था। राजजीत ने हाईकोर्ट से भी ड्रग्स तस्करी में फंसे इंद्रजीत के साथ उनके संबंधों की जांच करवाने की मांग की थी। क्योंकि एसटीएफ उन्हें इस मामले में झूठा फंसाना चाहती है।

राजजीत की मांग पर गठित हुई थी एसआइटी

हाईकोर्ट ने एसएसपी राजजीत की मांग पर चट्टोपाध्याय की अगुवाई में तीन पुलिस अधिकारियों की एसआइटी गठित की थी। चटोपाध्याय ने आशंका जताई है कि मामले की जांच की एक रिपोर्ट अदालत को सौंपी गई है और अभी तक की पड़ताल के बाद संकेत मिल रहे हैं कि ड्रग्स मामले के तार उच्च पुलिस अधिकारियों से भी जुड़ सकते हैं। इसीलिए उन्हें पुलिस के बड़े अधिकारियों की शह पर चड्ढा मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है

कुछ नहीं कह सकता : यादव

चड्ढा आत्महत्या की जांच कर रही एसआइटी हेड आईजी एलके यादव ने कहा है कि चट्टोपाध्याय को भेजी प्रश्नावली पर वह मीडिया में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।

मामला अदालत में है : डीजीपी

इस बारे में डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने कहा है कि मामला अदालत में है। इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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