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मोहाली के डेराबस्सी में भारत माला एक्सप्रेस वे के लिए जमीन कब्जाने पहुंचे अधिकारी, किसानों ने लौटाया

Published: Sat, 03 Oct 2026 06:47 PM (IST)

मोहाली के डेराबस्सी में भारतमाला एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहित जमीन पर कब्जा लेने आए अधिकारियों को किसानों ने लौटा ...और पढ़ें

भारत माला एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहण की गई जमीन का कब्जा लेने का विरोध। (सांकेतिक फोटो)

भारत माला एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहण की गई जमीन का कब्जा लेने का विरोध। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. दोफाड़ जमीनों के लिए रास्ते और गांवों को कनेक्टिविटी की मांग।

  2. माॅल विभाग के रिकॉर्ड में दुरुस्ती न होने से किसान परेशान।

  3. आश्वासन के बाद भी अधिकारियों ने समस्या का नहीं किया समाधान।

संवाद सहयोगी, डेराबस्सी। भारत माला एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहण की गई जमीन का कब्जा लेने आए अधिकारियों को किसानों ने शनिवार को बैरंग लौटा दिया। किसान दोफाड़ हुई जमीनों को सर्विस रोड देने, दर्जन के करीब पड़ते गांवों को एक कनेक्टिविटी देने और माॅल विभाग में रिकॉर्ड की दुरुस्ती करने की मांग कर रहे है।

डेराबस्सी-बनूड़ रोड संघर्ष कमेटी के प्रधान बलजिंदर सिंह ने बताया कि उनकी भारतमाला एक्सप्रेस हाईवे के लिए डेराबस्सी विधानसभा के राजोमाजरा, अमलाला, बरौली, कारकोर, शेखूपुरा, महिमदपुर, धनौनी, बाकापुर आदि दर्जन के करीब गांवों की जमीन सड़क के लिए अधिग्रहण की गई है।

इस कारण जमीनें दोफाड़ हो गई हैं और न ही इन गांवों के लिए इस सड़क पर उतरने व चढ़ने के लिए कोई रास्ता दिया जा रहा है। जमीन अधिग्रहण हुए करीब चार साल हो गए हैं, अभी तक न तो सड़क के नाम इंतकाल दर्ज किए गए हैं और न ही किसानों की जमीनों की दुरुस्ती की गई है।

उन्होंने कहा कि माल विभाग के रिकॉर्ड में दुरुस्ती न होने के कारण 3ए और 3डी के नोटिस दर्ज हैं, जिस कारण जमीन से संबंधित कोई भी काम नहीं हो सकता। किसानों ने रोष जाहिर करते हुए कहा कि इन मुश्किलों संबंधी प्रशासनिक एवं एनएचएआई अधिकारियों के साथ तीन महीने पहले बैठक हुई थी और उक्त मुश्किलों को तुरंत हल करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि आज सड़क बनाने वाली सीगल कंपनी के अधिकारी जेसीबी साथ लेकर जमीन का कब्जा लेने आए थे, लेकिन उन्हें बेरंग लौटना पड़ा। किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक उनकी उक्त मुश्किलों का समाधान नहीं हो जाता, वे किसी भी कीमत पर जमीन का कब्जा नहीं देंगे।