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जीरकपुर के दयालपुर में सरकारी डिस्पेंसरी पर ताला, इलाज को तरस रहे हजारों लोग

Published: Thu, 10 Sep 2026 11:35 AM (IST)

दयालपुर की सरकारी डिस्पेंसरी अक्सर बंद रहती है, जिससे हजारों गरीब मरीजों को इलाज के लिए डेराबस्सी जाना पड़ता है।

जीरकपुर के दयालपुर में सरकारी डिस्पेंसरी बंद।

जीरकपुर के दयालपुर में सरकारी डिस्पेंसरी बंद।

HighLights

  1. दयालपुर डिस्पेंसरी अक्सर बंद, मरीजों को डेराबस्सी जाना पड़ता है

  2. डिस्पेंसरी की चाबी निजी दुकानदार के पास, सुरक्षा पर सवाल उठे

  3. सिविल सर्जन ने मामले की जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया

मेजर अली, जीरकपुर। गांवों में गरीब और जरूरतमंद लोगों को घर के पास स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए खोली गई दयालपुर की सरकारी डिस्पेंसरी ही अब सरकारी व्यवस्था की बदहाली की कहानी बयां कर रही है।

वीरवार को डिस्पेंसरी पर ताला लटका मिला। इलाज और दवा लेने पहुंचे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पहली बार नहीं है। कभी डॉक्टर समय पर पहुंचती हैं तो कभी मरीजों को पूरा दिन इंतजार करने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलती।

दयालपुर के अलावा आसपास की सोसायटियों, कॉलोनियों, झुग्गियों और छोटे मकानों में रहने वाले हजारों लोग इस डिस्पेंसरी पर निर्भर हैं। इनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव की सरकारी डिस्पेंसरी ही बंद मिले तो छोटी बीमारी और सामान्य दवा के लिए भी उन्हें डेराबस्सी का रुख करना पड़ता है। इससे समय और आने-जाने का खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।

ताला देखकर लौट रहे मरीज

स्थानीय लोगों ने कहा कि बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। लोग यह उम्मीद लेकर पहुंचते हैं कि गांव में ही डॉक्टर से जांच और दवा मिल जाएगी, लेकिन कई बार दरवाजे पर ताला देखकर वापस लौटना पड़ता है।

ग्रामीणों ने डॉक्टर के व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग से शिकायतों की जांच कराने की मांग की है।

सरकारी डिस्पेंसरी की चाबी निजी दुकानदार के पास

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया कि डिस्पेंसरी की चाबी एक निजी दुकानदार के पास रहती है। दुकानदार ने बताया कि चाबी उसके पास रखी जाती है और कोई मरीज आए तो वह चाबी देकर डिस्पेंसरी खुलवा देता है।

इस व्यवस्था ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी डिस्पेंसरी की चाबी निजी व्यक्ति के पास क्यों है? उसे चाबी रखने की अनुमति किसने दी? डिस्पेंसरी में रखी सरकारी दवाओं, रिकार्ड और सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? ग्रामीणों ने इन सवालों के जवाब मांगे हैं।

सुबह 10 बजे के बाद डॉक्टर से किया संपर्क

दैनिक जागरण द्वारा सुबह 10 बजे के बाद डॉक्टर सोनिया शर्मा से फोन पर संपर्क किया गया। डॉक्टर ने कहा, “मैं रास्ते में हूं, वहां पहुंचकर कॉल करती हूं।” हालांकि, खबर लिखे जाने तक उनका दोबारा फोन नहीं आया और डिस्पेंसरी बंद रहने तथा ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर उनका विस्तृत पक्ष नहीं मिल सका।

सिविल सर्जन बोलीं- करवाई जाएगी जांच

मामले को लेकर सिविल सर्जन मोहाली डॉ. संगीता जैन ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा, “इस मामले की इनक्वायरी करवाई जाएगी और जो भी बनती कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।”

ग्रामीणों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डिस्पेंसरी का औचक निरीक्षण करें, डॉक्टर की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें और बाहर ड्यूटी का समय स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करवाएं।

साथ ही निजी दुकानदार के पास चाबी रखे जाने की व्यवस्था की भी जांच की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने सुविधा गांव में दी है तो उसका लाभ भी लोगों को नियमित रूप से मिलना चाहिए।