चंडीगढ़, जेएनएन। केस के आइओ ने कानून के मुताबिक इन केसों की जांच नहीं की है और न ही जरूरी सुबूत (गवाह) पेश किए है। जांच अधिकारी ने इन केसों मे लापरवाही बरती है। यह टिप्पणी गोल्ड चेन स्नैचिंग के आठ केसों में दो आरोपितों को बरी करते हुए जेएमआइसी जज संजय ने की। स्मार्ट सिटी की स्मार्ट पुलिस किस तरह से अपना काम कर रही है, इसका पता यहीं से चल जाता है कि दर्ज किए गए केसों को वह खुद ही कोर्ट में साबित ही नहीं कर पा रहे है। ऐसे में चंडीगढ़ पुलिस की काफी किरकिरी हो रही है। ऐसे ही केस जेएमआइसी जज संजय की कोर्ट में देखने को मिले जहां पुलिस नाकाम साबित हुई।

दरअसल पुलिस ने दो युवकों पर गोल्ड चेन स्नैचिंग के आठ केस वर्ष 2015 में दर्ज किए थे। लेकिन अब किसी भी केस को वह कोर्ट में साबित ही नहीं कर पाई। जिसकी वजह से दोनों युवक बरी हो गए। बरी हुए युवकों की पहचान कमल ठाकुर और हरप्रीत के रूप में हुई। सातवीं कक्षा तक पढ़ा हरप्रीत मोहाली के मुल्लांपुर का रहने वाला है और सेल्समैन का काम करता है। वहीं, कमल ठाकुर मूल रूप से शिमला का रहना वाला है और मुल्लांपूर में किराये के कमरे पर रहता था। पुलिस ने दोनों पर सभी केस अप्रैल, 2015 में ही दर्ज किए थे।

स्वतंत्र गवाह पेश ही नहीं हुए

दोनों को बरी करते हुए जज टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस ने इन केसों में जिन्हें स्वतंत्र गवाह बनाया था, वह पेश ही नहीं हुए और न ही अभियोजन पक्ष ने केस ट्रायल के दौरान उन्हें एग्जामिन भी नहीं करवाया। इसके साथ ही कहा कि केस के आइओ ने कानून के मुताबिक इन केसों की जांच नहीं की है और न ही जरूरी सुबूत (गवाह) पेश किए है। जांच अधिकारी ने इन केसों मे लापरवाही बरती है। कहा कि एफआइआर नंबर 175 (जिसमें सभी स्नै¨चग की रिकवरी दिखाई गई थी) के आइओ को क्यों इन केसों में ज्वाइन किया गया, इसके बारे में भी कुछ नहीं बता पाए। जो जांच की गई है, वह दोषपूर्ण है और जो जांच की गई है, वह इतनी पर्याप्त नहीं है कि दोनों आरोपितों के दोष को साबित करती हो।

पुलिस ने युवकों को फंसाया

पुलिस ने युवकों को केस में झूठा फंसाया हुआ था। केसों को पुलिस अदालत में साबित ही नहीं कर पाई। कई केसों में जो रिकवरी दिखाई गई थी, शिकायतकर्ता उनके बिल ही नहीं दिखा पाए। पुलिस ने वारदात को अंजाम देते हुए जिस बाइक का इस्तेमाल करने का जिक्र किया है, उसका नंबर ही नहीं बता पाई। वहीं, सेक्टर-11 थाना पुलिस ने 20 अप्रैल, 2015 को एफआइआर नंबर 175 दर्ज की थी जिसमें सभी केसों की स्नैचिंग की रिकवरी दिखाई थी लेकिन इस केस के जांच अधिकारी को पेश ही नहीं करवाया।

-अंकुर चौधरी, बचाव पक्ष के वकील 

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!