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पंजाबी छा गए ओए! ब्रिटिश कोलंबिया प्रांतीय चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी ने रचा इतिहास, 15 पंजाबियों की जीत

By Nirmal Singh ManshahiaEdited By: Nitish Kumar Kushwaha
Published: Mon, 26 Oct 2026 10:07 AM (IST)

ब्रिटिश कोलंबिया के प्रांतीय चुनावों में कंजर्वेटिव पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल किया और लोर्न डोर्कसन के नेतृत्व में सरकार बनाएगी।

(ऊपर बाएं से दाएं) मनदीप धालीवाल, हरमल धालीवाल, गैरी पुरेवाल, जैसी सहोता, जीशान वाहला, मोनिका, हरमन भंगू व गैरी थिंद। (नीचे बाएं से दाएं) स्टीव कूनर, जोडी तूर, पवनीत सिंह, दीप संधू, राज चौहान, निक्की शर्मा, रोहिनी अरोड़ा। नोट- फोटो एआई की मदद से एडिट किया गया है।

(ऊपर बाएं से दाएं) मनदीप धालीवाल, हरमल धालीवाल, गैरी पुरेवाल, जैसी सहोता, जीशान वाहला, मोनिका, हरमन भंगू व गैरी थिंद। (नीचे बाएं से दाएं) स्टीव कूनर, जोडी तूर, पवनीत सिंह, दीप संधू, राज चौहान, निक्की शर्मा, रोहिनी अरोड़ा। नोट- फोटो एआई की मदद से एडिट किया गया है।

HighLights

  1. कंजर्वेटिव पार्टी ने ब्रिटिश कोलंबिया चुनाव में पूर्ण बहुमत जीता

  2. लोर्न डोर्कसन के नेतृत्व में बनेगी नई कंजर्वेटिव सरकार

  3. सोलह भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने चुनाव में जीत दर्ज की

निर्मल सिंह मानशाहिया, चंडीगढ़। ब्रिटिश कोलंबिया में समय से पहले हुए प्रांतीय चुनाव में ऐतिहासिक उलटफेर हुआ है। कंजर्वेटिव पार्टी शानदार प्रदर्शन करते हुए अंतरिम नेता लोर्न डोर्कसन के नेतृत्व में सरकार बनाने जा रही है। पार्टी ने 93 सदस्यीय विधानसभा में 64 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया।

बहुमत की सरकार बनाने के लिए 47 सीटों की जरूरत होती है। एनडीपी 27 सीटों पर सिमट गई, जबकि ग्रीन पार्टी को दो सीटें मिलीं। नवगठित पार्टियों सेंटर बीसी और वन बीसी को एक भी सीट नहीं मिली। खास बात यह रही कि इन चुनावों में भारतीय मूल के 16 उम्मीदवार जीते, जिनमें 15 मूल रूप से पंजाब से संबंधित हैं।

कुछ दिन पहले तक अंदरूनी कलह की शिकार थी पार्टी

माना जा रहा है कि प्रीमियर और एनडीपी नेता डेविड एबी को समय से पहले अचानक चुनाव कराने का खामियाजा पूरी पार्टी को भुगतना पड़ा। बीसी कंजर्वेटिव पार्टी ने जहां पूरे प्रांत में शानदार जीत हासिल की, वहीं सरी की सभी 10 सीटें जीतकर एनडीपी का सफाया कर दिया।

कंजर्वेटिव की जीत के साथ ब्रिटिश कोलंबिया ने करीब एक सदी में पहली बार कंजर्वेटिव बहुमत वाली सरकार चुनी है। यह वही कंजर्वेटिव पार्टी है, जो कुछ समय पहले अंदरूनी कलह का शिकार थी और भारी विरोध के कारण पार्टी नेता को इस्तीफा देना पड़ा था। पार्टी ने लोर्न डोर्कसन को अंतरिम नेता बनाया था।

तीसरी बार विधायक बने पत्रकार डोर्कसन

प्रीमियर डेविड एबी ने विपक्ष के बिखरे होने का फायदा उठाने की उम्मीद में दो साल पहले ही चुनाव की घोषणा कर दी, लेकिन उनका यह दांव उलटा पड़ गया। पेशे से पत्रकार रहे डोर्कसन 2020 में पहली बार कैरीबू से विधायक बने थे और अब इसी क्षेत्र से तीसरी बार जीते हैं।

इस बीच डेविड एबी ने पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए एनडीपी नेता के पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उल्लेखनीय है कि डेविड एबी ने अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध का हवाला देकर मजबूत जनादेश हासिल करने के लिए मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की थी।

सरी की सभी 10 सीटों पर कंजर्वेटिव उम्मीदवार जीते कंजर्वेटिव पार्टी की नीली लहर का असर हर ओर देखने को मिला। खास बात यह रही कि प्रांतीय राजनीति में सरी की 10 सीटों की हमेशा अहम भूमिका रही है। कंजर्वेटिव पार्टी के सरी से सभी उम्मीदवारों ने एनडीपी प्रत्याशियों को करारी शिकस्त देकर जीत हासिल की।

लंबे समय से एनडीपी का गढ़ रहे सरी न्यूटन क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ रहे कंजर्वेटिव उम्मीदवार हरज धालीवाल जीते। उन्होंने एनडीपी उम्मीदवार जैसी सुन्नड़ को हरा दिया।

ये पंजाबी जीते

एनडीपी की ओर से रोहिणी अरोड़ा, राज चौहान और निक्की शर्मा। कंजर्वेटिव पार्टी की मोनिका मोहन, पवनीत सिंह, हरमन भंगू, जोडी तूर, स्टीव कूनर, जीशान वाला, मनदीप सिंह धालीवाल, गैरी पुरेवाल, गैरी थिंद, जैसी सहोता, दीप संधू और हरजीत तालीवाल।

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