'क्यों लिया गया यह फैसला?', अमृतपाल सिंह से NSA हटाने पर भड़के कांग्रेस सांसद रंधावा; सरकार से मांगा जवाब
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अमृतपाल सिंह से एनएसए हटाए जाने पर सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने खुफिया एजेंसियों की विफलता और ऑपरेशन लोटस पर भी सवाल उठाए।

अमृतपाल सिंह से NSA हटाने पर भड़के कांग्रेस सांसद रंधावा (जागरण फोटो)
HighLights
रंधावा ने अमृतपाल सिंह से NSA हटाने पर सवाल उठाए
खुफिया एजेंसियों की विफलता पर गंभीर चिंता व्यक्त की
पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना जताई
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। गुरदासपुर से कांग्रेस के सदस्य सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह पर से नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) हटाए जाने को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। रंधावा ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि इतने संवेदनशील मामले में एनएसए हटाने का फैसला क्यों लिया गया।
उन्होंने इसे गंभीर करार देते हुए कहा कि हाल ही में रेलवे ट्रैक को उड़ाने की धमकी और बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री की बरामदगी राज्य की सुरक्षा के लिए चिंताजनक संकेत हैं।
उनका आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में पंजाब और केंद्र की खुफिया एजेंसियां विफल रही हैं, जो एक बड़ा सुरक्षा जोखिम पैदा करता है। रंधावा ने वीरवार को चंडीगढ़ पंजाब भवन में एक प्रेस वार्ता कर प्रदेश से जुड़े कई मुद्दों को उठाया।
ऑपरेशन लोट्स के मुद्दे पर क्या बोले रंधावा?
रंधावा ने 1 मई को बुलाए गए पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में ऑपरेशन लोटस के मुद्दे पर भी विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन उस समय लगाए गए आरोपों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने याद दिलाया कि उस दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा समेत करीब एक दर्जन विधायकों ने डीजीपी को शिकायत सौंपी थी। लेकिन आज तक मामले में कोई कार्रवाई सरकार की ओर से नहीं की गई।
कांग्रेस सांसद ने मांग की है कि सरकार और डीजीपी स्पष्ट करें कि उस शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता शीतल अंगुराल, जो अब पूर्व विधायक हैं और भाजपा में शामिल हो चुके हैं, क्या उन्हें जांच में शामिल किया गया या नहीं।
अपनी स्थिति मजबूत दिखाना चाहती है आप
रंधावा ने कहा कि इतने गंभीर मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल न होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एक मई को विशेष सत्र में भरोसे का प्रस्ताव लाकर अपनी स्थिति मजबूत दिखाना चाहती है, ताकि अगले छह महीनों तक राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित करने के लिए सत्र बुलाने की स्थिति से बचा जा सके।
सात राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में जाने को उन्होंने बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और आप सरकार की नाकामी बताई। भाजपा से उन्हें भी आफर मिलने के सवाल पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि अभी तक तक तो नहीं। रंधावा ने कहा कि मौजूदा सरकार अब सिर्फ एक दो महीने की मेहमान है और पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगना तय है।
