कैलाश नाथ, चंडीगढ़। नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश प्रधान पद से इस्तीफा दिए हुए 5 दिन का समय बीत चुका है। इसके बावजूद सिद्धू के इस्तीफे को लेकर असमंजस की स्थिति बरकरार है। अभी तक पार्टी हाईकमान ने सिद्धू के इस्तीफे पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, सिद्धू को मनाने का प्रयास भी पार्टी हाईकमान द्वारा नहीं किया गया है। इस बीच, सोशल मीडिया के जरिये सिद्धू द्वारा किए जा रहे हमलों के बीच मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा है कि सिद्धू पार्टी का काम देखें, जबकि कमोवेश यही बात पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कहा करते थे।

इस्तीफे को जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे है वैसे-वैसे सिद्धू से पंजाब कांग्रेस के नेता दूरी बढ़ाने लगे हैं। 28 सितंबर को इस्तीफा दिए जाने के बाद पंजाब कांग्रेस के विधायकों व मंत्रियों का सिद्धू के पटियाला स्थित निवास स्थान पर तांता लगा हुआ था, लेकिन बीतते समय के साथ इस संख्या में खासी कमी देखने को मिल रही है। नवजोत सिंह सिद्धू को रजिया सुल्ताना का तो साथ मिला और उन्होंने कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दिया, लेकिन राजनीति में उनके दाएं हाथ माने जाने वाले परगट सिंह का साथ नहीं मिला। वहीं, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी अब सिद्धू को नसीहत देनी शुरू कर दी है कि उन्हें संगठन में अपना काम देखना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी सिद्धू को यही कहा करते थे कि उन्हें संगठन पर ध्यान देना चाहिए, सरकार के कामकाज पर नहीं।

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अब सवाल यह उठ रहे है कि क्या पार्टी हाईकमान सिद्धू का इस्तीफा मंजूर करेगा या सिद्धू अपना इस्तीफा वापस लेंगे, क्योंकि सिद्धू ने अभी तक एक भी ऐसे संकेत नहीं दिए कि वह अपने पांव पीछे खींचने को तैयार हैं और न ही पार्टी हाईकमान ने कोई कोशिश की कि वह सिद्धू को मनाना चाहता है। उधर, पार्टी के महासचिव व प्रदेश प्रभारी हरीश रावत का कहना है ‘नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की बात हुई है। जिन मुद्दों पर सिद्धू की नाराजगी है, उन पर उनकी (सिद्धू) और मुख्यमंत्री चन्नी की बातचीत अभी भी चल रही है। हम भी इस मामले में मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं। इस मामले में बातचीत के लिए एक साथी (हरीश चौधरी) को पंजाब भेजा है।’

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हालांकि हरीश रावत इस बात पर कुछ भी नहीं कह रहे हैं कि पार्टी सिद्धू का इस्तीफा मंजूर करेगी या नामंजूर। वहीं, सिद्धू को लेकर मुख्यमंत्री ने संकेत देने शुरू कर दिए हैं कि एक हद के बाद वह सिद्धू का हस्तक्षेप सरकार में नहीं चाहते हैं। खास बात यह है कि कैप्टन सरकार के दौरान जो नेता सिद्धू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे वह भी फिर मंत्री बनने के बाद अपने-अपने कामों में व्यस्त नजर आ रहे हैं। उनकी ओर से भी सिद्धू को मनाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। बता दें कैप्टन सरकार के दौरान सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखबिंदर सिंह सरकारिया सिद्धू के काफी करीब थे। जिन्होंने अब दूरी बनाकर रखी हुई है।

Edited By: Kamlesh Bhatt