चंडीगढ़, जेएनएन। पंजाब यूनिवर्सिटी में इन दिनों एक जैसे विचार रखने वाली या फिर ऐसा कहे कि एक ही संगठन में आइसा और एसएफएस में फूट पड़ चुकी है। इसका सुबूत इस बात से ही मिलता है कि एसएफएस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को एबीवीपी के खिलाफ धरना दिया और वहीं, पीयू छात्र इकाई आइसा ने एक बयान जारी कर परिसर में एसएफएस के कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा छात्र की पिटाई को एक गैर-जिम्मेदाराना व बचकाना बताया। एसएफएस को इस संदर्भ में आत्म-आलोचना और संयम के साथ काम करना चाहिए।

गौरतलब है कि एसएफएस और आइसा यह दोनों छात्र संगठन वामपंथी विचारधारा से प्रेरित हैं। आइसा हर मोर्च पर एसएफएस के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ा हुआ है। आइसा और एसएफएस में फूट पडऩे के बाद इन छात्र संगठनों के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। मारपीट के मामले में आइसा का एसएफएस का विरोध करने से एक बात तो जाहिर हो गई है कि दोनों छात्र संगठनों में सब कुछ ठीक नहीं है।

प्रदर्शन में शामिल नहीं हुआ आइसा

सोमवार को एसएफएस का स्टूडेंट सेंटर पर एबीवीपी के खिलाफ किए गए विरोध प्रदर्शन में भी आइसा शामिल नहीं हुआ। जिससे इन दोनों संगठनों की फूट सबके सामने उजागर हो गई है। प्रदर्शन में एसएफएस के साथ केवल पीएसयू ललकार ही दिखा। इस प्रदर्शन में नाममात्र के ही लोग एकत्रित हुए।

 

 

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Posted By: Vikas Kumar

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