लुधियाना/जालंधर, [मुनीष शर्मा, कमल किशोर]। कोरोना के साथ भी जिंदगी चल पड़ी है। पिछले डेढ़ माह में में बंदी व मंदी के संक्रमण से ग्रस्त पंजाब के उद्योगों को निर्यात की संजीवनी मिलने लगी है। विदेशी खरीदारों से मिल रहे ऑर्डरों ने विभिन्न उद्योगों में जान भर दी है। पंजाब की औद्योगिक इकाइयों को अप्रैल से अब तक विदेशी खरीदारों से करीब पांच हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं। इंजीनियरिंग , साइकिल , हैंडटूल , एसेंशियल गुड्स , यार्न , गारमेंट्स एवं फूड इंडस्ट्री को विदेश से ऑर्डर मिल रहे हैं।

अप्रैल से अब तक विदेशी खरीदारों से मिले करीब पांच हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर

कोरोना वायरस से जंग में लगे कर्फ्यू में राज्य में एक माह से अधिक समय तक औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां बद रहीं। सरकार ने कुछ ढील दी है तो ये सभी गतिविधियां शुरू हो गई हैं। औद्योगिक इकाइयों ने 30 फीसद मजदूरों के साथ काम तो शुरू कर दिया है। लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इस समय पर्याप्त घरेलू खरीदार नहीं मिल रहे हैं तो वे तैयार माल की खपत कहां करे। ऐसे में इस बार पिछले साल की तुलना में पचास फीसद से अधिक ऑर्डर विदेश से मिलने लग पड़े तो उद्योग जगत को नई दिशा मिली है।

पिछले साल की तुलना में 50 से 70 अधिक मिल रहे ऑर्डर

इसका कारण विदेशी खरीदारों का चीन से मोह भंग माना जा रहा है। जालंधर से खेल उत्पाद और चमड़े से बनी वस्तुओं का विदेश में निर्यात होता है। लॉकडाउन में मिली छूट के बाद यहां की खेल इंडस्ट्री को देश-विदेश से 44 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं। इनमें से 40 करोड़ के ऑर्डर विदेश से मिले हैं। उधर, लेदर इंडस्ट्री को कोई नया ऑर्डर तो नहीं मिला है, लेकिन राज्य में कर्फ्यू लगने से पहले मिले 15 करोड़ के ऑर्डर जरूर हैं। जहां अन्य उद्योगों को कर्फ्यू से पहले मिले ऑर्डर रद हो गए थे, वहीं, लेटर इंडस्ट्री को पहले मिले ऑर्डर रद न होने से राहत मिली है। 

खेल, चमड़ा, इंजीनियरिंग , साइकिल , हैंडटूल , एसेंशियल गुड्स , यार्न , गारमेंट्स व फूड इंडस्ट्री ने पकड़ी गति

पैरामाउंट इंपेक्स के एमडी राकेश कपूर कहते हैं कि विदेशी खरीदार ट्रैक्टर और ट्रेलर की पुर्जों की काफी मांग कर रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार हमें पचास प्रतिशत अधिक ऑर्डर मिलें हैं। ये ऑर्डर मुख्य रुप से अमेरिका और यूरोप के बाजार से मिले हैं। हालांकि, कर्फ्यू में उत्पादन ठप होने से कई ऑर्डर कैंसिल करने पड़े।

वूल उत्पाद बनाने वाली कंपनी गंगा एक्रोवूल के प्रेसीडेंट अमित थापर के मुताबिक घरेलू बाजार में काफी मंदी का असर देखने को मिल रहा है, निर्यात को लेकर अच्छा रूझान देखने को मिल रहा है। इस समय कंपनी को बांग्लादेश और श्रीलंका से मिले ऑर्डरों से संजीवनी मिली है।

रैमसन एक्सपोर्ट के एमडी वरुण कपूर के मुताबिक बात साइकिल के पुर्जों की बात करें तो इस समय अफ्रीका ने चीन के बजाय अब भारत को बंपर ऑर्डर दिए हैं। हमारी कंपनी को पिछले साल के मुकाबले 70 प्रतिशत अधिक ऑर्डर मिले हैं। इस समय सबसे बड़ी चुनौती इन ऑर्डरों को पूरा करना है।

लुधियाना के कस्टम विभाग के कमिश्नर एएस रंगा के मुताबिक एक अप्रैल से अब तक 12, 683 कंटेनरों को निकाला  गया है। इनमें से 6,093 कंटेनर निर्यात के लिए पोर्ट टर्मिनलों तक जा चुके हैं। विभाग ने इस दौरान 104.60 करोड़ रुपये की ड्यूटी भी जुटाई है।

जालंधर में खेल इंडस्ट्री, लेदर इंडस्ट्री के साथ-साथ ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री भी उत्पादन में लग गई हैं। महज तीस प्रतिशत श्रमिक काम में जुटे हुए हैं, लेकिन हौसला बेशुमार है। कई इकाइयों में श्रमिक बीस प्रतिशत से कम हैं। शारीरिक दूरी का भी ख्याल रखा जा रहा है। ऑटो पार्ट्स बनाने की जालंधर में कुल 80 यूनिट हैं। ये यूनिट प्रतिवर्ष करीब 700 करोड़ का कारोबार करती हैं।

जालंधर ऑटो पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि जालंधर की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को घरेलू और विदेशी खरीदारों से 30 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन अजय सिक्का ने कहा कि इंडस्ट्री में उत्पादन शुरू कर फिलहाल घरेलू व विदेशी खरीदारों से मिले ऑर्डरों को पूरा किया जा रहा है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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