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मोहाली के छतबीड़ चिड़ियाघर में अब नहीं दिखेगी सफेद बाघिन दीया, 13 साल की उम्र में तोड़ा दम

Published: Sun, 18 Oct 2026 05:33 PM (IST)

छतबीड़ चिड़ियाघर की पहचान सफेद बाघिन दीया का 13 वर्ष की आयु में निधन हो गया। दीया पर्यटकों के लिए ...और पढ़ें

13 वर्षों से चिड़ियाघर की पहचान बनी दीया ने रविवार सुबह अंतिम सांस ली।

13 वर्षों से चिड़ियाघर की पहचान बनी दीया ने रविवार सुबह अंतिम सांस ली।

HighLights

  1. मौत के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल सका।

  2. प्रजनन एवं संरक्षण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान।

  3. 2013 को छतबीड़ चिड़ियाघर में ही हुआ था जन्म।

संवाद सहयोगी, डेराबस्सी (माेहाली)। छतबीड़ स्थित महेंद्र चौधरी प्राणी उद्यान में आने वाले पर्यटकों को अब सफेद बाघिन दीया देखने को नहीं मिलेगी। पिछले 13 वर्षों से चिड़ियाघर की पहचान बनी दीया ने रविवार सुबह अंतिम सांस ली। 

दीया न केवल पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र थी, बल्कि बाघों के प्रजनन एवं संरक्षण कार्यक्रम में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उसकी मौत के वास्तविक कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। इसके लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (गडवासू), लुधियाना भेजा जा रहा है।

चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, सफेद बाघिन दीया का जन्म 28 जुलाई 2013 को छतबीड़ चिड़ियाघर में ही हुआ था। उसके माता-पिता सफेद बाघ लक्की और डॉली थे। जन्म से लेकर अंतिम समय तक दीया का अधिकांश जीवन इसी चिड़ियाघर में बीता।

सफेद रंग की वजह से थी आकर्षण का केंद्र

सफेद रंग के कारण वह बच्चों सहित पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र थी। दीया ने वर्ष 2019 में तीन शावकों अर्जुन, अमर और दिलनूर को जन्म दिया था। इनमें अर्जुन आज भी छतबीड़ चिड़ियाघर में मौजूद है, जबकि अमर को रोहतक चिड़ियाघर भेज दिया गया था।

खास बात यह है कि दीया का बेटा अर्जुन भी अब बाघों के प्रजनन कार्यक्रम का हिस्सा बन चुका है। गुजरात के राजकोट से लाई गई बाघिन गौरी के साथ अर्जुन से भी शावकों का जन्म हो चुका है। इस तरह दीया की अगली पीढ़ी चिड़ियाघर में उसके वंश को आगे बढ़ा रही है।

औसत उम्र से अधिक जीवित रही दीया

चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, कैद में रहने वाले सफेद बाघों की औसत आयु सामान्यतः 10 से 12 वर्ष बताई जाती है, जबकि दीया ने 13 वर्ष, दो महीने और 21 दिन की उम्र पूरी की। हालांकि, उसकी मौत उम्र संबंधी कारणों से हुई या किसी बीमारी के चलते, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

प्रबंधन ने बताया कि लुधियाना में पशु चिकित्सकों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा। इसके बाद निर्धारित नियमों और वन्यजीव संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार अंतिम संस्कार सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। चिड़ियाघर प्रशासन ने दीया की मौत को प्राणी उद्यान और वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम के लिए बड़ी क्षति बताया है।

तीन पीढ़ियों से जुड़ी छतबीड़ चिड़ियाघर की यादें

सफेद बाघ लक्की और डॉली की संतान दीया ने छतबीड़ चिड़ियाघर में जन्म लिया और यहीं तीन शावकों को जन्म देकर बाघों के संरक्षण कार्यक्रम में योगदान दिया। अब उसका बेटा अर्जुन भी प्रजनन कार्यक्रम के माध्यम से अगली पीढ़ी को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में दीया की मौत के बावजूद उसका वंश छतबीड़ चिड़ियाघर में मौजूद है।