कैलाश नाथ, चंडीगढ़। अवैध रेत खनन को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस में अलग-थलग पड़ने लगे हैं। पार्टी का कोई भी नेता उनके बचाव में नहीं आया है, जबकि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार भूपिंदर सिंह हनी के यहां हुई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को लेकर कांग्रेस पूरे जोरशोर के साथ चन्नी के साथ खड़ी नजर आ रही थी, लेकिन अवैध रेत खनन को लेकर लग रहे आरोपों को लेकर पार्टी का कोई भी नेता आगे नहीं आ रहा है। यहां तक कि कांग्रेस के प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू भी केवल छापेमारी की टाइमिंग पर सवाल खड़े कर रहे है।

सिद्धू का कहना है, इस मामले में वह किसी को क्लीन चिट नहीं दे रहे हैं। ईडी को छापेमारी मामले में संबंध साबित करना होगा। अगर ईडी ऐसा करती है तो मैं सबसे पहले निंदा करूंगा, लेकिन अभी यह राजनीतिक बदलाखोरी ही दिख रही है, क्योंकि 2018 में दर्ज हुई एफआइआर को लेकर ईडी अभी तक क्यों सोई रही। कुंभकर्ण भी छह माह बाद जाग जाता था।

कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिद्धू ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी को क्लीन चिट नहीं दे रहे हैं। अहम बात यह है कि सिद्धू ने मुख्यमंत्री भांजे भूपिंदर सिंह हनी के पास से मिले 10 करोड़ रुपये, 21 लाख रुपये के सोना और 12 लाख की घड़ी को लेकर कोई जवाब नहीं दिया। अहम बात यह है कि ईडी की छापेमारी को लेकर भले ही मुख्यमंत्री के साथ चार कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारियां और ब्रह्म मोहिंद्रा सामने आए हों, लेकिन अवैध रेत खनन को लेकर अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा लगाए जा रहे सीधे-सीधे आरोपों को लेकर कोई भी मंत्री सामने नहीं आया है।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अवैध रेत खनन की आग में यह कहते हुए घी डाल दिया कि कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने रेत खनन के कारोबार में जुड़े मंत्रियों के खिलाफ उन्हें बतौर मुख्यमंत्री कार्रवाई करने से रोक दिया था, जबकि अकाली दल शुरू से ही मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह का नाम अवैध रेत खनन से जोड़ता जा रहा है। नवजोत सिंह सिद्धू खुद ही अवैध रेत खनन को रोकने के लिए कारपोरेशन बनाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। सिद्धू के पंजाब माडल में भी यह भी शामिल है। 

वहीं, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी मंत्री भी अवैध रेत खनन के आरोपों को लेकर बचाव में सामने नहीं आ रहे है। पार्टी हाईकमान भी जिस तेजी से ईडी की कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री के बचाव में आया था, रेत खनन को लेकर हाईकमान ने भी चुप्पी साध रखी है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री इस मामले में पार्टी में अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं।

Edited By: Kamlesh Bhatt