मोहाली, जेएनएन। संसद में जब किसानों विरोधी कानूनों पर चर्चा हो रही थी तो कांग्रेस का एक भी लोकसभा सदस्य बोलने के लिए मौजूद नहीं था। अब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह किसान विरोधी बिल बताकर पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को मांगपत्र सौंप रहे हैं जोकि कोरी राजनीति है। आनंदपुर साहिब लोकसभा हलके से पूर्व संसद सदस्य प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने पत्रकारों के साथ बातचीत में यह बात कही। चंदूमाजरा अपने निवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे।

चंदूमाजरा ने कहा कि किसान विरोधी इन बिलों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अकाली दल को विश्वास में नहीं लिया गया। पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने संसद में भी इन बिलों का जमकर विरोध किया है। लेकिन उक्त किसान विरोधी बिल जोकि संसद में पास होकर कानून बनने हैं उनका विरोध करने के लिए एक भी कांग्रेसी लोकसभा सदस्य संसद में नहीं था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस कितनी किसान हितैषी है।

चंदूमाजरा ने कहा कि अकाली दल किसानों के साथ खड़ा है। किसान विरोधी इन बिलों को लेकर अपना विरोध केंद्र के पास दर्ज करवाया जा चुका है। लोकसभा में भी इसको लेकर सुखबीर सिंह बादल ने अपना रूख स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री कैप्टन को चाहिए कि वे सिर्फ फोटो ¨खचवाने के चक्कर में इस तरह राज्यपाल को ज्ञापन देकर अपने आप को किसानों का हमदर्द न बताएं। बल्कि जहां विरोध करना है वहां पर कांग्रेस के सदस्य व नेता विरोध करें।

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