इंस्पेक्टर अमनजोत थे चंडीगढ़ के ‘टफ कॉप’, लॉरेंस को पकड़ा; गैंगस्टर दिलप्रीत के खिलाफ गवाही देने क्यों नहीं आ रहे?
लॉरेंस बिश्नोई को पहली बार गिरफ्तार करने वाले वीआरएस ले चुके चंडीगढ़ पुलिस में इंस्पेक्टर रहे अमनजोत सिंह अब गैंगस्टर ...और पढ़ें

वीआरएस ले चुके इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह।
HighLights
गवाही से अनुपस्थिति पर उठे सवाल।
अदालत ने बार- बार समन जारी किए।
21 सितंबर को होनी है सुनवाई।
रवि अटवाल, चंडीगढ़। वीआरएस ले चुके इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह कभी चंडीगढ़ पुलिस के ‘टफ कॉप’ के तौर पर जाने जाते थे। लॉरेंस बिश्नोई को पहली बार उन्होंने ही गिरफ्तार किया था, लेकिन अब गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह उर्फ बाबा के खिलाफ गवाही देने कोर्ट में पेश नहीं हो रहे। इससे कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
अदालत की ओर से बार-बार समन भेजे जा रहे हैं। दिलप्रीत के साथ आठ साल पहले 2018 में सेक्टर-43 बस स्टैंड के पास हुई पुलिस मुठभेड़ के मामले में भी उनकी गवाही होनी है। अदालत कई बार जमानती वारंट जारी कर चुकी है, लेकिन अमनजाेत नहीं पहुंच रहे। अब 21 सितंबर के लिए भी समन जारी किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार दिलप्रीत सिंह और रंजीत सिंह वर्ष 2014 के एक मामले में वांछित थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि दिलप्रीत सिंह सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार से सेक्टर-43 बस स्टैंड पहुंचेगा। गिरफ्तारी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस की कई टीमों का गठन किया गया था।
दोपहर के समय पुलिस टीम को सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार आती दिखाई दी। इंस्पेक्टर गुरचरण सिंह की टीम ने कार को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक ने वाहन नहीं रोका। इसके बाद इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह ने अपनी फॉर्च्यूनर कार से पीछा करते हुए स्विफ्ट डिजायर को पीछे से टक्कर मार दी।
पुलिस के अनुसार, वाहन रोकने के प्रयास में दूसरी टीम ने कार की विंडस्क्रीन पर पत्थर फेंके। इसके बाद दिलप्रीत सिंह हथियार लेकर कार से बाहर आया और पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी।
पुलिस का आरोप है कि उसने इंस्पेक्टर अमनजोत सिंह और इंस्पेक्टर शिव कुमार की ओर गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में डीएसपी राकेश यादव ने गोली चलाई, जो दिलप्रीत के पैर में लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
इस कार्रवाई में अमनजोत सिंह पुलिस की उस विशेष टीम का हिस्सा थे और मामले के महत्वपूर्ण गवाह हैं। अभियोजन पक्ष के लिए उनकी गवाही इसलिए भी अहम है क्योंकि वह घटनास्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों में शामिल थे।
इसलिए कहा जाता था ‘टफ कॉप’
| वर्ष/पहलू | विवरण |
|---|---|
| 26 साल पुलिस सेवा | करीब 26 साल के करियर में कई चर्चित आपराधिक मामलों की जांच में अहम भूमिका निभाई। |
| ‘टफ कॉप’ की पहचान | कठिन और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच के लिए पुलिस विभाग में अलग पहचान बनी। |
| जयपाल भुल्लर गैंग पर शिकंजा | कुख्यात अंतरराज्यीय हाईवे लुटेरे जयपाल भुल्लर गैंग के सदस्यों को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई। |
| राज्यवार मजबूत नेटवर्क | पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में मजबूत पुलिस नेटवर्क का कई मामलों को सुलझाने में फायदा मिला। |
| 2004- रनपाल गुज्जर | वांछित अपराधी रनपाल गुज्जर को पकड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। |
| 2005-आतंकी गिरफ्तारी | सेक्टर-17 आईएसबीटी से हथियार और गोला-बारूद समेत एक आतंकी को गिरफ्तार किया। |
| 2007- सीए हत्याकांड | चार्टर्ड अकाउंटेंट राकेश गोयल की हत्या की गुत्थी सुलझाने में योगदान दिया। |
| 2008-अनुराधा हत्याकांड | अनुराधा हत्याकांड को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। |
| 2008- डिंपी शूटआउट | सुखना लेक के पास हुए डिंपी शूटआउट की गुत्थी सुलझाने में योगदान दिया। |
| 2011-तनिष्क में लूट | जनवरी 2011 में तनिष्क ज्वेलरी शोरूम में लूट के आरोपितों को पकड़ने में सफलता हासिल की। हालांकि बाद में आरोपित अदालत से बरी हो गए। |
| 2021-जयपाल एनकाउंटर | ए-कैटेगरी गैंगस्टर जयपाल भुल्लर को पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ ने कोलकाता में मुठभेड़ में मार गिराया। |
| विभागीय विवाद | 2012 में अनुशासनहीनता के आरोप में विभागीय जांच शुरू हुई थी। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दिया, जिसे विभाग ने स्वीकार कर लिया था। |
| इस्तीफा वापस लिया | बाद में पुलिस विभाग द्वारा दो विभागीय जांच बंद करने के फैसले के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। |
