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चंडीगढ़ ने तैयार किया ‘आईस पैक कंडीशनिंग स्टेशन’, वैक्सीन को जमने से बचाएगा; केंद्र सरकार ने भी सराहा

Published: Wed, 23 Sep 2026 07:05 AM (IST)

चंडीगढ़ ने वैक्सीन को जमने से बचाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'आईस पैक कंडीशनिंग स्टेशन' विकसित किया ...और पढ़ें

चंडीगढ़ ने आईस पैक कंडीशनिंग स्टेशन’ तैयार किया।

चंडीगढ़ ने आईस पैक कंडीशनिंग स्टेशन’ तैयार किया।

HighLights

  1. चंडीगढ़ ने वैक्सीन सुरक्षा के लिए किया बड़ा उपाय।

  2. यह मॉडल तैयार करने वाला पहला राज्य होने का दावा।

  3. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नवाचार को सराहा।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए तापमान की जरा सी चूक भी भारी पड़ सकती है। खासकर वैक्सीन कैरियर में डोज को तय तापमान से नीचे जाने से बचाना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए चुनौती रहता है।

इसी समस्या के समाधान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ‘आईस पैक कंडीशनिंग स्टेशन’ तैयार किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस नवाचार की सराहना की है और इसे राष्ट्रीय टीकाकरण पत्रिका ‘इंडिया इम्यूनाइजेशन अपडेट’ में प्रकाशित किया है।

चंडीगढ़ का दावा है कि इस तरह का माडॅल तैयार करने वाला वह देश का पहला राज्य है।  दरअसल, वैक्सीन को सामान्य तौर पर 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में सुरक्षित रखा जाता है।

स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन को आईस-लाइन रेफ्रिजरेटर ( आईएलआर) में रखा जाता है, जबकि टीकाकरण सत्रों और आउटरीच कैंपों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए वैक्सीन कैरियर का इस्तेमाल होता है।

पल्स पोलियो और मीजल्स-रूबेला जैसे अभियानों में भी वैक्सीन कैरियर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वैक्सीन कैरियर में इस्तेमाल होने वाले आईस पैक डीप फ्रीजर में करीब -15 से -25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर जमाए जाते हैं। इन्हें सीधे वैक्सीन कैरियर में रखने पर अंदर का तापमान 2 डिग्री से नीचे जा सकता है।

इससे विशेष रूप से फ्रीज-सेंसिटिव वैक्सीन जमने का खतरा रहता है। इसलिए आइस पैक को इस्तेमाल से पहले सामान्य तापमान तक लाने की प्रक्रिया को ‘कंडीशनिंग’ कहा जाता है। कंडीशनिंग सही तरीके से नहीं होने पर वैक्सीन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।

वाॅश बेसिन में आइस पैक रखने की जरूरत खत्म

अब तक कई स्वास्थ्य केंद्रों में आईस पैक को वाॅश बेसिन या टेबल पर रखकर कंडीशन किया जाता था। पर्याप्त जगह की कमी के साथ इस तरीके में स्वच्छता को लेकर भी चिंता रहती है। गंदी सतह या वाॅश बेसिन से बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीवों के वैक्सीन कैरियर तक पहुंचने का खतरा रहता है।

चंडीगढ़ का नया माॅडल इसी समस्या को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। स्टेनलेस स्टील से बने चार-स्तरीय स्टेशन में एक चक्र में 36 आईस पैक कंडीशन किए जा सकते हैं। इसमें पानी की निकासी के लिए अलग व्यवस्था है और चारों तरफ से हवा का संचार होता है।

पहियों से आसानी से कहीं भी ले जा सकेंगे

स्टेशन को इस तरह तैयार किया गया है कि इसे पहियों की मदद से आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सके। इसमें टेबल की सतह को गंदा होने से बचाने के साथ आइस पैक की कंडीशनिंग को ज्यादा स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है। सामान्य तरीके की तुलना में इसमें कंडीशनिंग की प्रक्रिया भी तेज होती है।

वैक्सीन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम

राज्य टीका अधिकारी डाॅ. मंजीत सिंह के अनुसार आईस पैक की सही कंडीशनिंग कोल्ड चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका सीधा संबंध वैक्सीन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता से है।

नए स्टेशन से स्वास्थ्य कर्मियों को आइस पैक तैयार करने के लिए ज्यादा स्वच्छ, व्यवस्थित और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। चंडीगढ़ का यह माॅडल अब राष्ट्रीय टीकाकरण से जुड़ी पत्रिका में जगह मिलने के बाद दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी एक संभावित माॅडल के रूप में सामने आया है।