चंडीगढ़ में वार्ड आरक्षण का विरोध शुरू, सीनियर डिप्टी मेयर हाईकोर्ट में देंगे चुनौती; जानें क्यों है आपत्ति
सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह चंडीगढ़ में वार्ड आरक्षण ड्राफ्ट को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उनका तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण गलत है।

मीटिंग में सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह भावुक हो गए।
HighLights
2011 की जनगणना के आधार पर ड्रॉ को बताया गलत।
अनुसूचित जाति आबादी कई वार्डों से शिफ्ट हुई।
वार्ड 32 से स्लम हटने पर भी एससी आरक्षित, आबादी अब कम।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। वर्ष 2011 की जनगणना को आधार मानते हुए वार्ड आरक्षित किए गए हैं। हालांकि वर्ष 2011 और अब में वार्ड की जनसंख्या में काफी अंतर आ चुका है। यह अंतर जनसंख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है बल्कि अनुसूचित जाति की जनसंख्या के शिफ्ट होने का भी है। इसके बाद अब पार्षद इस ड्राॅ को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर चुके हैं।
खासकर सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह जनहित याचिका दायर करेंगे। यह निर्णय उन्होंने वार्ड वासियों के आग्रह पर लिया है। रविवार को वार्ड के लोगों ने इस संबंध में एकजुट होकर मीटिंग की। इस मीटिंग के दौरान जसमन के साथ वार्ड वासी भी भावुक हो गए।
उन्होंने कहा कि नियमों के खिलाफ वार्डबंदी का वह विरोध करेंगे। कोर्ट में जाकर न्याय मांगेंगे। जसमनप्रीत सिंह ने साफ कहा कि उसके वार्ड से कालोनी नंबर पांच हटने के बाद पूरे वार्ड में 12000 में से 100 वोट भी अनुसूचित जाति वर्ग की नहीं बची होंगी।
बावजूद इसके वार्ड को आरक्षित कर दिया गया। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ड्रा पूरी तरह से निराधार है। वह इसको चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं। बता दें कि 2011 से अब तक कई बड़ी काॅलोनियों को हटाया गया है। इनका पुनर्वास कर दूसरी जगह भेजा गया है। इन काॅलोनियों के साथ ही बड़ी संख्या में यहां रहने वाली अनुसूचित जाति की आबादी भी शिफ्ट हो गई।
यह काॅलोनी हो चुकी शिफ्ट
इसका सबसे बड़ा उदाहरण वार्ड-32 है। इस वार्ड में शहर की सबसे बड़ी स्लम काॅलोनी नंबर-5 थी जिसे 2013 में हटा दिया गया था। 6110 परिवारों को धनास में पुनर्वास आवास देकर बसाया गया था। यह काॅलोनी हटने के बाद इस वार्ड में अनुसूचित जाति वर्ग की जनसंख्या गिनती की रह गई।
हालांकि बेस वर्ष 2011 की जनगणना होने से अनुसूचित जाति वर्ग की जनसंख्या शिफ्ट होने के बाद भी यह वार्ड एससी रिजर्व हो गया है। वहीं दूसरा रोचक तथ्य यह है कि यह काॅलोनी धनास में शिफ्ट हुई है। उस हिसाब से वहां अनुसूचित जाति की आबादी पहले से कहीं अधिक हो गई है।
बावजूद इसके यह वार्ड ड्राॅ में सामान्य वर्ग के लिए ओपन रखा गया है। इसी तरह से इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित काॅलोनी नंबर-4, संजय काॅलोनी को भी हटाया गया। काॅलोनी नंबर-4 के मतदाता मलोया कालोनी में पुनर्स्थापित हुए। इससे इन दोनों वार्ड में भी आरक्षण का गणित बदला है।
