विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चंडीगढ़ में लावारिस शवों की नहीं होगी बेकद्री, अंतिम संस्कार तक बनेगी व्यवस्था; प्रशासन का हाईकोर्ट को भरोसा

Published: Sat, 12 Sep 2026 05:23 PM (IST)

चंडीगढ़ में लावारिस और अज्ञात शवों के गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन ने एक योजना तैयार की है। हाईकोर्ट ...और पढ़ें

चंडीगढ़ में लावारिस या पहचान में न आ सके व्यक्तियों के शवों के गरिमा से अंतिम संस्कार की बनेगी व्यवस्था। (सांकेतिक फोटो)

चंडीगढ़ में लावारिस या पहचान में न आ सके व्यक्तियों के शवों के गरिमा से अंतिम संस्कार की बनेगी व्यवस्था। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. लावारिस शवों के गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार की योजना बनी।

  2. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन से योजना का ब्योरा लिया।

  3. याचिकाकर्ता को योजना अध्ययन कर सुझाव देने को कहा गया।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में लावारिस या पहचान में न आ सके मृत व्यक्तियों के शवों की बेकद्री नहीं होगी। शवों से गरिमापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करने और उन्हें जल्द से जल्द अंतिम संस्कार तक पहुंचाने के लिए अब व्यवस्था बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।

इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए यूटी चंडीगढ़ प्रशासन से तैयार की गई योजना का ब्योरा लिया। प्रशासन ने अदालत को बताया कि इस उद्देश्य के लिए योजना तैयार कर ली गई है और उसकी प्रति याचिकाकर्ता को भी उपलब्ध करा दी गई है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने की। याचिका एचसी अरोड़ा ने स्वयं पेश होकर दायर की है।

याचिका में मांग की गई थी कि संबंधित अधिकारियों को ऐसी उचित नीति बनाने का निर्देश दिया जाए, जिससे मृत पाए गए और पहचान किए गए शवों के साथ सम्मानजनक तरीके से व्यवहार हो तथा उन्हें जल्द से जल्द अंतिम संस्कार के लिए भेजा जा सके। 

सुनवाई के दौरान यूटी चंडीगढ़ की ओर से पेश अधिवक्ता हिमांशु मलिक ने न्यायालय को बताया कि इस उद्देश्य के लिए योजना तैयार की जा चुकी है। प्रशासन की ओर से योजना की प्रति याचिकाकर्ता एचसी अरोड़ा को भी सौंप दी गई।

इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को योजना का अध्ययन करने के लिए कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि योजना में अभी भी किसी पहलू पर विचार किए जाने की आवश्यकता है तो याचिकाकर्ता अगली सुनवाई के दौरान उन बिंदुओं को न्यायालय के सामने रख सकते हैं।

अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि मामले में अब प्रशासन द्वारा तैयार योजना की प्रभावशीलता और उसमें शामिल व्यवस्थाओं पर आगे विचार किया जाएगा। फिलहाल हाईकोर्ट ने प्रशासन को किसी नई नीति का तत्काल मसौदा तैयार करने का निर्देश देने के बजाय पहले से तैयार योजना को याचिकाकर्ता के परीक्षण के लिए रखा है।

यदि याचिकाकर्ता को इसमें कोई कमी या ऐसा पहलू दिखाई देता है, जिस पर अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत है, तो उसे अगली तारीख पर अदालत के समक्ष उठाया जा सकेगा। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यही तारीख निर्धारित की है।

प्रशासन और पुलिस समझें जिम्मेदारी

एचसी अरोड़ा ने चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जनहित याचिका दायर कर अज्ञात शवों की पहचान, पोस्टमार्टम, अंतिम संस्कार और अस्थियों के धार्मिक रीति से विसर्जन की पूरी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कराने के निर्देश देने की मांग की है।

''पहचान के लिए अपील'' की सूचनाओं का अध्ययन

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में शव मिलने के 10 से 18 दिन बाद तक समाचार पत्रों में पहचान के लिए सूचना प्रकाशित की गई। याचिकाकर्ता के अनुसार उन्होंने वर्ष 2026 में चंडीगढ़ पुलिस की ओर से विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित ''पहचान के लिए अपील'' संबंधी सूचनाओं का अध्ययन किया।

इसमें 24 जनवरी को मिले शव की सूचना छह फरवरी को, छह फरवरी को मिले शव की सूचना 17 फरवरी को, 31 मार्च को मिले शव की सूचना 18 अप्रैल को तथा 20 अप्रैल को मिले शव की सूचना एक मई को प्रकाशित होने का उल्लेख है।

इसी तरह 14 मई को मिले शव की सूचना 20 मई को, 16 मार्च को मिले शव की सूचना 25 मार्च को और एक अगस्त को मिले शव की सूचना 12 तथा 18 अगस्त को प्रकाशित हुई।  

सात से 18 दिन तक का अंतर

याचिका में कहा गया है कि इन मामलों से स्पष्ट होता है कि शव मिलने और समाचार पत्र में पहचान की अपील प्रकाशित होने के बीच सात से 18 दिन तक का अंतर रहा। इसके बाद भी पुलिस पहचान के लिए कुछ और समय लेती है।

ऐसे में शव मिलने के बाद अंतिम संस्कार तक कम से कम दो सप्ताह का समय लगने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ता ने इसे मानवीय गरिमा और मृत व्यक्ति के सम्मान के विरुद्ध बताया है।