चंडीगढ़, [सुमेश ठाकुर]। मां की ममता के कई उदाहरण देखे और सुने होंगे। एक ऐसा ही उदाहरण पेश कर रही हैं चंडीगढ़ की एक किन्नर। इस मातृ दिवस के उपलक्ष्य पर हम आपको शहर की किन्नर की ममता से परिचित करवाते हैं।

चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित किन्नर डेरे की महंत कमली मां खुद तो मां नहीं बन सकती लेकिन तीन बेटियों के लिए मां से बढ़कर है। कमली ने तीन बच्चियों को बड़े प्यार-दुलार पाल रही हैं। कमली के पास परवरिश पा रही सबसे बड़ी बच्ची काम्या छठी कक्षा में पढ़ती है, जबकि दूसरी अमान्या छह साल की है, वहीं सबसे छोटी नौ महीने रीया है। जिन्हें कमली ठीक उसी प्यार और दुलार से देते हुए पाल रही है जैसे एक जन्म देने वाली मां पालती है। कमली कहती है कि भगवान ने उन्हें ये बच्चे वरदान में दिए हैं, क्योंकि भगवान को पता है कि वह कभी मां नहीं बन सकती। इसलिए इन तीन बेटियों के पालन-पोषण का काम दिया है। कमली इन तीनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर एक बेहतर जिंदगी  देना चाहती हैं।

बच्चों को पालना मां की ड्यूटी नहीं, सौभाग्य है

कमली कहती है कि भले ही मैं मां नहीं बन सकती लेकिन मां का प्यार बच्चों को जरूर दे सकती हूं। इन बच्चों काे पालने में मुझे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि इन्हें पालना मेरी ड्यूटी नहीं बल्कि सौभाग्य है। मैं एक मां हूं जिसके पास बच्चे शरारत भी करते हैं कई बार परेशान भी करते हैं। बच्चे जब तंग करते हैं तो उनसे परेशान नहीं हुआ जाता बल्कि उन्हें डांटकर समझाया जाता है। वही कर्म मैं भी कर रही हूं।

कोई डॉक्टर और तो बनना चाहती है पुलिस अफसर

डेरे की पल रही काम्या ने बताया कि वह बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हैं क्योंकि डॉक्टर हमेशा लोगों को ठीक करते हैं। इसी प्रकार से अमान्या बताती हैं कि उसे पुलिस में जाना है क्योंकि पुलिस कभी गलत नहीं होने देती वह हमेशा सभी को बचाकर रखती है। स्कूल में होने वाले नुक्कड़ नाटकों में भी अमान्या हमेशा पुलिस का ही अभिनय करना चाहती हैं। 

गरीब बेटियों का करती हैं कन्यादान

कमली डेरे में आने वाले बच्चों को पालने के साथ कई लड़के और लड़कियों की शादियों भी करवाती हैं। कमली कहती है कि शादी में कन्यादान करना या फिर मां-बाप की भूमिका निभाना सौभाग्य है। मैं खुद किन्नर हूं इसीलिए मुझे ऐसे मौके मिलते है। सबसे बड़ी खुशी की बात है कि मैंने जिस बेटी की शादी की उसके पास अब बच्चा है जिसके दुनिया में आने के बाद मैं मां के बाद नानी भी बन गई। 

Edited By: Ankesh Thakur