विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चंडीगढ़ में 15 दिन बाद नहीं रहेगा किसी भी सड़क पर अंधेरा, दीवाली से पहले जगमग होगा पूरा शहर

Published: Sat, 10 Oct 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

चंडीगढ़ नगर निगम ने दिवाली से पहले शहर की सभी खराब स्ट्रीट लाइट्स को 15 दिन में ठीक करने का ...और पढ़ें

चंडीगढ़ में 55 हजार लाइट्स की व्यवस्था दुरुस्त करेगा नगर निगम।

चंडीगढ़ में 55 हजार लाइट्स की व्यवस्था दुरुस्त करेगा नगर निगम।

HighLights

  1. नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार के अपनी टीम को सख्त निर्देश।

  2. नगर निगम 55 हजार स्ट्रीट लाइट्स की व्यवस्था दुरुस्त करेगा।

  3. टाइमर लगेंगे, 10 साल के लिए निजी कंपनी को रखरखाव मिलेगा।

बलवान करिवाल, चंडीगढ़। दीवाली पर शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को रोशनी से जगमग करने के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है। शहर में अंधेरे वाले हिस्सों को खत्म करने के लिए निगम कमिश्नर अमित कुमार ने इंजीनियरिंग विभाग को अगले 15 दिन में सभी खराब स्ट्रीट लाइट्स ठीक करने का अल्टीमेटम दिया है।

अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि तय समय-सीमा में मरम्मत का काम पूरा किया जाए, ताकि रोशनी के त्योहार पर शहर की सड़कों, डिवाइडिंग रोड और सार्वजनिक स्थलों पर अंधेरे की शिकायत न रहे।

नगर निगम के अधीन शहर में करीब 55 हजार स्ट्रीट लाइट्स हैं। इनमें लगभग 40 हजार लाइट्स आंतरिक सड़कों और डिवाइडिंग रोड पर लगी हैं, जबकि करीब 15 हजार लाइट्स पार्कों, ग्रीन बेल्ट, खुले क्षेत्रों और पार्किंग स्थलों में हैं।

इसके अलावा लगभग पांच हजार स्ट्रीट लाइट्स यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के अधीन आती हैं। निगम ने अपने अधीन आने वाली लाइट्स को दुरुस्त करने के लिए अभियान शुरू किया है। इसके साथ ही स्ट्रीट लाइट्स पर टाइमर लगाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

ईईएसएल का करार खत्म, अब रखरखाव की चुनौती

शहर की पारंपरिक स्ट्रीट लाइट्स को एलईडी में बदलने और उनके रखरखाव के लिए नगर निगम ने फरवरी 2017 में एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) के साथ करीब 48 करोड़ रुपये का करार किया था।

इसके तहत लगभग 48 हजार स्ट्रीट लाइट्स को एलईडी में बदलना था। कंपनी को लाइट्स की आपूर्ति, स्थापना, संचालन, रखरखाव और वारंटी के तहत खराब लाइट्स बदलने की जिम्मेदारी सात वर्ष के लिए दी गई थी।

वर्ष 2024 में करार की अवधि समाप्त होने के बाद स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम ने अपने स्तर पर संभाल ली। ईईएसएल के कार्यकाल में केंद्रीय नियंत्रण एवं निगरानी प्रणाली (सीसीएमएस) के माध्यम से लाइट्स की निगरानी की व्यवस्था थी।

हालांकि, इसके कामकाज और शिकायतों के निस्तारण को लेकर निगम ने सवाल उठाए थे। करार समाप्त होने के बाद खराब लाइट्स की मरम्मत और नियमित रखरखाव निगम के लिए चुनौती बना हुआ है। अब दीवाली से पहले सभी खराब लाइटों को ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है।

टाइमर लगने से मैनुअल संचालन से मिलेगी राहत

स्ट्रीट लाइट्स को निर्धारित समय पर चालू और बंद करने के लिए इंजीनियरिंग विभाग टाइमर लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए टाइमर मंगवाए गए हैं और इन्हें चरणबद्ध तरीके से लगाया जाएगा। टाइमर लगने के बाद लाइट्स को रोजाना मैनुअल तरीके से चालू और बंद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

तय समय के अनुसार लाइट्स अपने आप जलेंगी और बुझेंगी। इससे संचालन में सुविधा होगी और लाइटों के समय पर चालू होने की व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

10 साल के लिए निजी कंपनी को जिम्मेदारी देने की तैयारी

नगर निगम अब स्ट्रीट लाइट्स के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए निजी कंपनी की मदद लेने की तैयारी में है। इस संबंध में अगली सदन बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा। कंपनी के चयन और कामकाज के लिए अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) तैयार कर लिया गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत स्ट्रीट लाइट्स को दस वर्ष के लिए एजेंसी को सौंपा जा सकता है। कंपनी के जिम्मे लाइटों को बदलने, संचालन और नियमित रखरखाव के साथ खराब लाइटों की मरम्मत तथा शिकायतों का समय पर निस्तारण करने की जिम्मेदारी होगी। इससे निगम को उम्मीद है कि स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लंबे समय तक व्यवस्थित रखा जा सकेगा।

शहर में स्ट्रीट लाइट्स का हिसाब

  • 55 हजार: नगर निगम के अधीन कुल स्ट्रीट लाइटें
  • 40 हजार: आंतरिक सड़कों और डिवाइडिंग रोड पर
  • 15 हजार: पार्क, ग्रीन बेल्ट, खुले क्षेत्रों और पार्किंग में
  • 5 हजार: यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के अधीन अतिरिक्त लाइटें
  • 15 दिन: खराब स्ट्रीट लाइटें ठीक करने की समय-सीमा

टाइमर से लेकर निजी एजेंसी तक, ये हैं प्रमुख कदम

  • मरम्मत अभियान: दीवाली से पहले खराब स्ट्रीट लाइट्स ठीक करने के निर्देश।
  • ऑटोमैटिक संचालन: टाइमर लगने से निर्धारित समय पर अपने आप जलेंगी-बुझेंगी लाइट्स।
  • निजी कंपनी की तैयारी: अगली सदन बैठक में प्रस्ताव लाने की योजना।
  • 10 साल की जिम्मेदारी: प्रस्तावित व्यवस्था में एजेंसी संभाल सकती है संचालन और रखरखाव।
  • शिकायतों पर नजर: खराब लाइट्स को बदलने और शिकायतों का समय पर निस्तारण करने की जिम्मेदारी भी एजेंसी की होगी।