चंडीगढ़ में एप से बुक होगी पार्किंग में जगह, सेक्टर-17 से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा नगर निगम
चंडीगढ़ नगर निगम अभी स्मार्ट पार्किंग पूरे शहर में शुरू करेगा। फिलहाल सेक्टर-17 से पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है, जिसमें सीसीटीवी निगरानी और एप-आधारित बुकिंग जैसी सुविधाएं होंगी।

शहर की पार्किंग व्यवस्था को स्मार्ट बनाने की कवायद। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
स्मार्ट पार्किंग प्रोजेक्ट फिलहाल पूरे पूरे शहर में नहीं।
सफलता के बाद अन्य क्षेत्रों में भी होगा विस्तार।
सीसीटीवी निगरानी, समय-आधारित शुल्क मुख्य सुविधाएं।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। शहर की पार्किंग व्यवस्था को स्मार्ट बनाने की कवायद अब पूरे शहर के बजाय सेक्टर-17 से शुरू होने जा रही है। नगर निगम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सेक्टर-17 की सभी पार्किंग को स्मार्ट पार्किंग साॅल्यूशन के तहत विकसित करने की तैयारी कर रहा है।
इसके लिए पार्किंग संचालन किसी निजी एजेंसी को सौंपने का प्रस्ताव नगर निगम सदन की आगामी बैठक में लाया जा सकता है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर सेक्टर-34 समेत शहर के अन्य इलाकों की पार्किंग को भी चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट किया जाएगा।
स्मार्ट पार्किंग में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, पार्किंग स्टाफ की बेहतर माॅनिटरिंग, एप के माध्यम से स्लाॅट बुक करने की सुविधा और पार्किंग में जगह उपलब्ध होने की जानकारी पहले से मिलने जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं।
इसके साथ ही पार्किंग शुल्क को समय के हिसाब से निर्धारित करने की व्यवस्था भी होगी। हालांकि चुनावी वर्ष होने के कारण पार्किंग शुल्क बढ़ाने या घंटों के हिसाब से अधिक शुल्क वसूलने का प्रस्ताव पर कोई भी राजनीतिक दल के पार्षद राजी नहीं होंगे।
अधिकारियों के निरीक्षण में सामने आई कमियां
नगर निगम के पास करीब 88 पेड पार्किंग हैं और फिलहाल इनका संचालन निगम खुद कर रहा है। पिछले दिनों अधिकारियों के निरीक्षण में पार्किंग संचालन में कई कमियां सामने आई थीं।
कई पार्किंग में वाहनों की पर्चियां नियमित रूप से जारी नहीं होने, वाहनों की निगरानी और पार्किंग शुल्क की वसूली में कमी जैसी शिकायतें सामने आई हैं। इससे पार्किंग संचालन पर होने वाला खर्च अधिक और निगम को मिलने वाला राजस्व अपेक्षाकृत कम रह जाता है।
एमसी वन पास से भी उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं
नगर निगम ने जनवरी में एमसी वन पास शुरू कर शहर की निगम संचालित पार्किंग को एक डिजिटल पास से जोड़ने की पहल की थी। शुरुआत में दोपहिया के लिए 250 रुपये और चारपहिया के लिए 500 रुपये मासिक पास रखा गया था।
बाद में तिमाही, छमाही और सालाना पास भी छूट के साथ शुरू किए गए। शहर में रोजाना बड़ी संख्या में वाहन पार्किंग में आते हैं, लेकिन डिजिटल पास और पार्किंग राजस्व की क्षमता के अनुरूप विस्तार नहीं हो पाया है। ऐसे में स्मार्ट पार्किंग के जरिए डिजिटल निगरानी और शुल्क वसूली को और मजबूत करने की तैयारी है।
सेक्टर-17 क्यों चुना गया
सेक्टर-17 शहर का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है और यहां पार्किंग की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। यहां वाहन भी एक समय में सबसे अधिक होते हैं। यहां पहले से मल्टीलेवल पार्किंग मौजूद है, लेकिन उसका भी पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं हो रहा।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-मई में इसकी चारपहिया पार्किंग की आक्यूपेंसी करीब 57 से 58 प्रतिशत रही, जबकि दोपहिया की आक्यूपेंसी 42 से 48 प्रतिशत के बीच रही। ऐसे में स्मार्ट पार्किंग के पायलट प्रोजेक्ट के लिए सेक्टर-17 को चुनना निगम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मल्टीलेवल पार्किंग का भी प्रस्ताव
राइट्स की व्यापक मोबिलिटी योजना में शहर में मल्टीलेवल पार्किंग के लिए आठ स्थान चिन्हित किए गए हैं। इनमें चार स्थान अकेले सेक्टर-17 में हैं। अन्य स्थान सेक्टर-34, सेक्टर-43 और आइटी पार्क फेज-1 में हैं। इनमें से किन्हीं एक दो स्थान पर प्रशासन से मंजूरी मिलने के बाद मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जाएंगी।
