चंडीगढ़ सेक्टर-26 मंडी में कितनी सफाई? तस्वीरों से होगा सच का खुलासा; हाईकोर्ट ने मांगे ताजा फोटो
हाईकोर्ट ने सेक्टर-26 मंडी की सफाई व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने प्रशासन से दो सप्ताह के भीतर ...और पढ़ें

सेक्टर-26 की मंडी में सफाई के दावों की जमीनी हकीकत जानने के लिए हाईकोर्ट ने ताजा तस्वीरें मांगी।
HighLights
सेक्टर-26 मंडी की सफाई व्यवस्था पर हाईकोर्ट की नजर।
यूटी प्रशासन ने सेनिटरी इंस्पेक्टर पदनाम से निगरानी बढ़ाई।
अदालत ने स्थायी सफाई व्यवस्था पर जोर दिया, दावों से इनकार।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। सेक्टर-26 स्थित सब्जी मंडी की सफाई व्यवस्था को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख बनाए रखते हुए अब जमीनी हकीकत की जांच के लिए ताजा तस्वीरें तलब की हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि मौके की स्थिति को फोटो के जरिए परखा जाएगा।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ के समक्ष यूटी प्रशासन की ओर से बताया गया कि सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए एक अहम प्रशासनिक कदम उठाया गया है।
नए पद सृजित करने के बजाय मंडी समिति में खाली पड़े ऑक्शन रिकार्डर के पद को सैनिटरी इंस्पेक्टर के रूप में पुन नामित किया गया है, जो अब विशेष रूप से सफाई और नगर निगम से जुड़े कार्यों की देखरेख करेगा।
यह मामला अदालत द्वारा स्वत संज्ञान लेते हुए शुरू की गई जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें एक अखबार में प्रकाशित खबर के आधार पर मंडी में गंदगी और अव्यवस्था के मुद्दे उठाए गए थे। इससे पहले कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि आखिर क्यों मूलभूत सफाई कार्य पूरी तरह ठेका कर्मचारियों के भरोसे चलाए जा रहे हैं।
सुनवाई के दौरान प्रशासन ने दावा किया कि मंडी में नियमित सफाई हो रही है। प्लेटफार्म की मरम्मत कर दी गई है और हालात पहले से बेहतर हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि स्थायी सैनिटरी इंस्पेक्टर का पद सृजित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, भर्ती नियम तैयार करने में समय लग सकता है।
अदालत ने इन दावों को सीधे स्वीकार करने के बजाय सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति की पुष्टि जरूरी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मंडी की अलग-अलग एंगल से ताजा तस्वीरें खींचकर दो सप्ताह के भीतर पेश की जाए, ताकि यह देखा जा सके कि पहले जो अव्यवस्था थी, वह वास्तव में खत्म हुई या नहीं।
खंडपीठ ने यह भी संकेत दिया कि केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं और सफाई व्यवस्था के लिए स्थायी एवं जवाबदेह ढांचा विकसित करना जरूरी है। पहले की सुनवाई में कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि जरूरी नगर सेवाओं को पूरी तरह आउटसोर्स करना निगरानी और अनुशासन दोनों को कमजोर करता है।
