तारकोल की कमी के बहाने चंडीगढ़ में सड़क निर्माण नहीं, स्कूली बच्चे हो रहे परेशान; हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
चंडीगढ़ के मनीमाजरा स्थित सरकारी स्कूल के बच्चों को गंदे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिकारी को रिकॉर्ड सहित किया तलब। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
चंडीगढ़ के मनीमाजरा का है मामला।
बच्चे गंदे, ऊबड़-खाबड़ रास्ते से जा रहे।
28 अक्टूबर को रिकाॅर्ड सहित होना होगा पेश।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। यूक्रेन में युद्ध के कारण तारकोल की कमी का हवाला देकर सड़क निर्माण का टेंडर जारी नहीं करने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मनीमाजरा स्थित सरकारी स्कूल तक पहुंचने वाले बच्चों की परेशानी से जुड़े जनहित मामले में हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी को तलब कर लिया है।
कोर्ट ने अधिकारी को 28 अक्टूबर को सभी मूल संबंधित रिकाॅर्ड के साथ पेश होने का निर्देश दिया है। हैरानी की बात यह है कि सड़क निर्माण की अनुमानित लागत 13.82 लाख रुपये बताई गई, लेकिन नगर निगम की ओर से अब तक न तो टेंडर जारी किया गया और न ही समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया।
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ के सामने हलफनामा रखा गया, जिसमें बताया गया कि संबंधित रास्ते पर सड़क बनाने के लिए 13.82 लाख रुपये का प्रारंभिक लागत अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
हालांकि, यूक्रेन युद्ध के कारण तारकोल की कमी होने का हवाला देते हुए टेंडर जारी नहीं करने की बात कही गई। इस पर खंडपीठ ने सवाल उठाया कि जब न तो टेंडर जारी किया गया और न ही शिकायत दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया, तो बच्चों की परेशानी का समाधान कैसे होगा।
कोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और सभी मूल रिकार्ड साथ लाने का आदेश दिया।
गंदगी और कच्चे रास्ते से स्कूल पहुंच रहे बच्चे
यह मामला मनीमाजरा के सेक्टर-13 स्थित पॉकेट नंबर-6 के राजकीय मॉडल मिडिल स्कूल से जुड़ा है। जनहित याचिका दाखिल करने वाले डेफाई जिंदल ने अदालत को बताया कि कक्षा पहली से सातवीं तक के विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने के लिए सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध नहीं है।
स्कूल में सुबह और शाम की दो पालियों में पढ़ाई होती है, जिससे शाम को छुट्टी के समय बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ जाती है। याचिका में बताया गया कि स्कूल तक जाने वाला रास्ता कच्चा, ऊबड़-खाबड़ और ढलानदार है।
आसपास झाड़ियां उगी हुई हैं, कूड़ा जमा रहता है और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं है। इसके अलावा, आसपास अस्थायी ढांचे और झुग्गियां होने के साथ स्कूल की चारदीवारी से करीब 50 से 60 फीट की दूरी पर एक नाला भी मौजूद है।
पहले भी दिए गए थे निरीक्षण के निर्देश
हाईकोर्ट ने इससे पहले चंडीगढ़ नगर निगम आयुक्त और केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य अभियंता को संबंधित रास्ते का निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ता ने रास्ते की स्थिति दर्शाने वाली तस्वीरें भी अदालत में पेश की थीं। उनका कहना था कि इन परिस्थितियों में खासकर सर्दियों के दौरान शाम की पाली में पढ़ने वाले नाबालिग बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
याचिका के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को नौ मार्च को कानूनी नोटिस भेजकर समस्या के समाधान की मांग की गई थी। स्कूल प्रबंधन ने भी कच्चे रास्ते और नाले की मौजूदगी को स्वीकार किया था। अब हाईकोर्ट की नजर इस बात पर है कि बच्चों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
