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वाइस रिकाॅर्डिंग ने पलटा केस, चंडीगढ़ कोर्ट में सच आया सामने; दुष्कर्म मामले में दिव्यांग को किया बरी

Published: Sun, 18 Oct 2026 05:42 PM (IST)

चंडीगढ़ कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में दिव्यांग विक्रम को बरी कर दिया। एक वाइस रिकॉर्डिंग ने केस का रुख ...और पढ़ें

चंडीगढ़ जिला अदालत ने सुनाया फैसला। (सांकेतिक फोटो)

चंडीगढ़ जिला अदालत ने सुनाया फैसला। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. चंडीगढ़ कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में दिव्यांग को बरी किया।

  2. वाइस रिकॉर्डिंग ने साबित किया झूठा था आरोप।

  3. सीएफएसएल जांच ने गवाह की आवाज की पुष्टि की।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। दुष्कर्म के एक मामले में जिला अदालत ने दिव्यांग आरोपित विक्रम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। वह सेक्टर-29 का रहने वाला है और उसकी एक टांग कटी हुई है।

विक्रम के खिलाफ छह साल पहले केस दर्ज हुआ था। उस पर एक महिला और उसके साथियों को नशीला पदार्थ देने और फिर महिला से दुष्कर्म करने के आरोप थे। हालांकि कोर्ट में एक वाइस रिकाॅर्डिंग चलाई गई जिसमें महिला का एक साथी विक्रम को झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहा था।

विक्रम का केस लड़ने वाले एडवोकेट एसके खुर्चा ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने भी जानबूझकर इस रिकार्डिंग को केस फाइल में शामिल नहीं किया। यह रिकार्डिंग आरोपित के फोन में थी। उन्होंने मोबाइल को कोर्ट के आदेश पर रिलीज करवाया और फिर रिकार्डिंग की हाईकोर्ट के आदेश पर फारेंसिक जांच हुई, तब जाकर कहीं सच सामने आ सका।

हाईकोर्ट तक पहुंचा विवाद

एडवोकेट खुर्चा ने बताया कि आरोपित के मोबाइल फोन में एक काल रिकार्डिंग थी, जिसमें केस से जुड़े एक गवाह इशान की रिकार्डिंग थी। वह रिकार्डिंग में कह रहा था कि मेरे पास एक लड़की है, मैं चाहूंगा तो वह बोल देगी कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है।

बचाव पक्ष ने इशान से दोबारा पूछताछ के लिए ट्रायल कोर्ट में आवेदन दिया, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद बचाव पक्ष ने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट के निर्देश पर गवाह से दोबारा पूछताछ हुई।

इसके बाद उस रिकाॅर्डिंग को कोर्ट में चलाया गया। इसमें वह आरोपित को फंसाने की बात कहता हुआ सुन रहा था, लेकिन गवाह ने इसे अपनी आवाज मानने से इनकार कर दिया।

सीएफएसएल जांच में निकला सच

गवाह के इनकार के बाद बचाव पक्ष ने आवाज की फारेंसिक जांच कराने के लिए ट्रायल कोर्ट में आवेदन दिया। उसकी यह याचिका भी खारिज हो गई। इसके बाद दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

हाईकोर्ट के निर्देश पर गवाह का वाइस सैंपल सेंट्रल फारेंसिक साइंस लेबोरेट्री (सीएफएसएल) भेजा गया। फारेंसिक जांच में यह साबित हो गया कि यह आवाज इसी गवाह की थी। ऐसे में पूरा केस ही पलट गया और कोर्ट ने आरोपित को बरी कर दिया।