चंडीगढ़ से प्रिंसिपल अनिल कुमार को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’, बौद्धिक दिव्यांगजनों को बना रहे सशक्त
चंडीगढ़ के जीआरआईआईडी संस्थान के प्रधानाचार्य अनिल कुमार को विशेष शिक्षा और बौद्धिक दिव्यांगजनों के पुनर्वास में योगदान के लिए 'वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार हासिल करते प्रिंसिपल अनिल कुमार।
HighLights
विभिन्न राज्यों के 51 शिक्षक किए गए सम्मानित।
विशेष शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान पर सम्मान।
यह सम्मान चंडीगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सेक्टर-31 स्थित राजकीय बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास संस्थान (जीआरआईआईडी) के प्रिंसिपल अनिल कुमार को विशेष शिक्षा और बौद्धिक दिव्यांगजनों के पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली स्थित इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ, सुप्रीम कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। अंतरराष्ट्रीय समरसता मंच की ओर से आयोजित इस समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, गणमान्य व्यक्तियों और सहभागी देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
समारोह में शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस दौरान विभिन्न राज्यों के कुल 51 शिक्षकों को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ और ‘शिक्षक गौरव पुरस्कार’ प्रदान किए गए।
जीआरआईआईडी में बौद्धिक दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जाता है। ऐसे में संस्थान के प्रधानाचार्य को मिला यह सम्मान चंडीगढ़ के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद अनिल कुमार ने आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें बौद्धिक दिव्यांगजनों की शिक्षा और उनके सशक्तीकरण के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें समाज में समान भागीदारी दिलाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
