कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़। स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ में साइकिल ट्रैक बनाकर जगह-जगह रख-रखाव न होने की वजह से बदहाली की हालात का जिम्मेदारी प्रशासन है। इसके बावजूद ठीक साइकिल ट्रैक होने पर भी साइकिल सवार उनपर न चलकर अपनी जान से खिलवाड़ करते हैं। 

शहर में साइकिल से चलने वाले 60 फीसद से ज्यादा लोग साइकिल ट्रैक का उपयोग नहीं करते है। साइकिल सवार ज्यादातर मुख्य सड़क का उपयोग करते है। हालांकि, इस वजह ज्यादातर साइकिल सवार ट्रैक की बदहाली, गड्ढा, अंधेरा और पेड़ होने से हादसे की डर को वजह बता रहे है।

लेकिन अब साइकिल चालकों की मनमर्जी नहीं चलेगी। गलत ट्रैक पर चलने, बिना हेलमेट साइकिल चलाने, गलत टर्न लेने वाले समेत अन्य कुछ नियमों के खिलाफ चलने वाले साइकिल सवार पर जल्द कार्रवाई की मंजूरी मिलने वाली है। इस प्रपोजल को काफी पहले ही चंडीगढ़ पुलिस, नगर निगम और डीसी आफिस की तरफ से प्रशासन को भेजा जा चुका है। इस पर मंजूरी मिलते ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार देश भर में सड़क हादसों में साइकिल सवारों की मौत होने के मामले में चंडीगढ़ चौथा असुरक्षित शहर है। 

साइकिल सवार के लिए नियमों में हेलमेट पहनना, साइकिल ट्रैक छोड़कर चलना, गलत टर्न लेना, ग्रीन लाइट के समय ट्रैफिक में घुस जाना और बिना साइकिल पर रिफ्लेक्टर लगाकर चलना कानूनी अपराध है। नियमों की अनदेखी पर पर 200 से 300 रुपये का चालान प्रपोजल में भेजा गया है।

सूत्रों के अनुसार 40 से 50 रुपये के चालान की अनुमति मिल सकती है। शहर में 200 किलोमीटर साइकिल ट्रैक बनाने में प्रशासन अब तक 22 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। शहर में तकरीबन दो लाख लोग साइकिल चलाते है। पब्लिक बाइक शेयरिंग प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न स्थानों 310 डाकिंग स्टेशन और 2500 साइकिल संचालित है। 

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"शहर के साइकिल ट्रैक पर बेहतर काम करने के साथ लोगों को ज्यादा जागरूक करने की आवश्यकता है। ज्यादातर साइकिल सवार नियमों की पालना नहीं करते है। ना हेलमेट, ना नियमों की परवाह कर कहीं से निकलने लगते है। रात से समय साइकिल सवार ट्रैक पर बिल्कुल नजर नहीं आते हैं।

                                                                        -हरमन सिंह सिद्धू, संस्थापक, अराइव सेव संस्था

Edited By: Ankesh Thakur

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